गंगटोक: सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग (गोले) ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) के चौथे पर्वतारोहण अभियान 'शिखर' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अभियान हिमालय की चुनौतीपूर्ण माउंट जोंगसोंग (Mount Jongsong) चोटी के लिए आयोजित किया गया है। समुद्र तल से करीब 7,462 मीटर ऊंची इस चोटी पर चढ़ाई के जरिए NDRF के जवान अपने पर्वतारोहण कौशल के साथ ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में आपदा प्रतिक्रिया की क्षमताओं को और मजबूत करेंगे।

चुनौतीपूर्ण चोटी की ओर बढ़ी NDRF टीम
माउंट जोंगसोंग हिमालय की ऊंची और कठिन चोटियों में शामिल है। अत्यधिक ऊंचाई, कम ऑक्सीजन, बर्फीला मौसम और तेजी से बदलती परिस्थितियां पर्वतारोहियों के लिए बड़ी चुनौती पैदा करती हैं। ऐसे इलाके में सफल अभियान के लिए तकनीकी प्रशिक्षण, शारीरिक क्षमता और टीम के बीच मजबूत समन्वय बेहद जरूरी होता है। अभियान 'शिखर' के दौरान NDRF की टीम इन्हीं कठिन परिस्थितियों में अपने प्रशिक्षण और क्षमता का प्रदर्शन करेगी। पर्वतारोहण अभियान को केवल चोटी तक पहुंचने के लक्ष्य के रूप में नहीं, बल्कि हाई-एल्टीट्यूड परिस्थितियों में काम करने के अनुभव को बढ़ाने के अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है।
आपदा प्रबंधन क्षमता मजबूत करने पर जोर
NDRF देश में प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं के दौरान बचाव तथा राहत अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हिमालयी राज्यों में भूस्खलन, हिमस्खलन, अचानक आने वाली बाढ़ और दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों को बचाने जैसी परिस्थितियों में प्रशिक्षित जवानों की जरूरत पड़ती है। पर्वतारोहण जैसे अभियानों से जवानों को कठिन भूभाग में आगे बढ़ने, सीमित संसाधनों में काम करने, रस्सियों और अन्य तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल करने तथा बेहद ठंडे वातावरण में टीमवर्क बनाए रखने का व्यावहारिक अनुभव मिलता है।
मुख्यमंत्री ने बढ़ाया जवानों का हौसला
अभियान को रवाना करते हुए मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने NDRF टीम को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने जवानों के साहस, अनुशासन और आपदा के समय लोगों की जान बचाने में उनके योगदान की सराहना की। मुख्यमंत्री ने अभियान को साहस और सेवा भावना से जुड़ा प्रयास बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि टीम माउंट जोंगसोंग की चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करेगी और सुरक्षित वापस लौटेगी।
क्यों खास है माउंट जोंगसोंग?
माउंट जोंगसोंग कंचनजंगा क्षेत्र की प्रमुख ऊंची चोटियों में शामिल है। इसकी ऊंचाई लगभग 7,462 मीटर बताई जाती है। यह भारत-नेपाल सीमा के पास हिमालयी क्षेत्र में स्थित है और इसका दुर्गम भूगोल इसे चुनौतीपूर्ण पर्वतारोहण अभियानों के लिए खास बनाता है। इतनी ऊंचाई पर मौसम अचानक बदल सकता है और तापमान बेहद नीचे चला जाता है। ऑक्सीजन का स्तर कम होने के कारण पर्वतारोहियों को ऊंचाई के अनुसार शरीर को ढालने के लिए पर्याप्त समय देना पड़ता है।
'शिखर' अभियान का व्यापक उद्देश्य
NDRF का यह चौथा पर्वतारोहण अभियान जवानों के शारीरिक और मानसिक कौशल को परखने के साथ आपदा प्रतिक्रिया के लिए उनकी तैयारी मजबूत करने का माध्यम भी है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बचाव अभियान सामान्य मैदानी ऑपरेशन से काफी अलग होते हैं। बर्फ, ग्लेशियर और खड़ी ढलानों के बीच किसी दुर्घटना या आपदा के दौरान तेजी से कार्रवाई करने के लिए विशेष प्रशिक्षण जरूरी होता है। ऐसे में 'शिखर' अभियान से हासिल अनुभव भविष्य में हिमालयी क्षेत्रों में होने वाले बचाव अभियानों में उपयोगी हो सकता है। माउंट जोंगसोंग की ओर रवाना हुई NDRF टीम के सामने अब कठिन मौसम और ऊंचाई की चुनौती होगी। अभियान की सफलता केवल चोटी तक पहुंचने में नहीं, बल्कि टीम की सुरक्षित वापसी और कठिन परिस्थितियों में हासिल अनुभव में भी निहित होगी।
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