दार्जिलिंग: भारत की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उदय और उसके राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की यात्रा पर आधारित किताब ‘From Political Untouchability to Pan India Dominance’ रिलीज की गई है। लेखक नवीन किरण प्रधान ने इस पुस्तक में भाजपा के वैचारिक विकास, राजनीतिक संघर्ष, बदलाव और राष्ट्रीय राजनीति में उसके विस्तार को ऐतिहासिक नजरिए से दर्ज करने का प्रयास किया है। किताब का विमोचन दार्जिलिंग के जिमखाना क्लब में किया गया।
लेखक के मुताबिक किताब लिखने का विचार उन्हें 4 मई को सामने आए बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद आया। प्रधान ने कहा कि उन्हें भी यह उम्मीद नहीं थी कि पश्चिम बंगाल जैसे भाषाई और सांस्कृतिक रूप से विशिष्ट राज्य में भाजपा को इतना बड़ा चुनावी समर्थन मिलेगा। इसी घटनाक्रम ने उन्हें पार्टी के उदय और उसके विस्तार की पृष्ठभूमि पर विस्तार से लिखने के लिए प्रेरित किया।
किताब भाजपा की यात्रा को जनसंघ से लेकर राष्ट्रीय राजनीति में प्रमुख शक्ति बनने तक के क्रम में देखती है। लेखक ने उल्लेख किया है कि 1984 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के पास केवल दो सीटें थीं और बाद के दशकों में पार्टी ने लगातार अपना राजनीतिक आधार बढ़ाया। पुस्तक इसी बदलाव के पीछे की विचारधारा, राजनीतिक रणनीति और विभिन्न दौर में पार्टी के सामने आई चुनौतियों को समझने की कोशिश करती है।
नवीन किरण प्रधान ने कहा कि यह पुस्तक भाजपा के समर्थन में लिखी गई राजनीतिक सामग्री नहीं है, बल्कि युवाओं को राजनीति को समझने और उसमें रुचि लेने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से लिखी गई है। उन्होंने कहा कि पार्टी के शुरुआती दौर में कई राजनीतिक दल उसके साथ गठबंधन या साझेदारी करने से परहेज करते थे, जबकि बाद में भाजपा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में पहुंच गई।
किताब को चार हिस्सों में बांटा गया है। पहला हिस्सा स्वतंत्रता से पहले के राजनीतिक संदर्भ से जुड़ा है, जबकि दूसरा हिस्सा स्वतंत्रता के बाद भाजपा और उससे पहले की राजनीतिक प्रक्रियाओं के विकास पर केंद्रित है। तीसरे हिस्से में दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों का इतिहास तथा गोरखा समुदाय की राजनीतिक आकांक्षाओं और भाजपा के साथ बदलते संबंधों को जगह दी गई है। चौथा हिस्सा भाजपा और भारत के सामने लेखक द्वारा चिन्हित चुनौतियों पर केंद्रित है।
पश्चिम बंगाल में भाजपा के विस्तार पर भी पुस्तक में विशेष ध्यान दिया गया है। लेखक के अनुसार भाजपा को राज्य में शुरुआती विधायी और संसदीय मौजूदगी 1998 और 1999 के दौरान मिली। उनके मुताबिक दार्जिलिंग लोकसभा सीट 2009 से पार्टी के लिए महत्वपूर्ण आधार बनी और उसके बाद वह सीट लगातार भाजपा के पास रही। यह हिस्सा दार्जिलिंग और पहाड़ी राजनीति के संदर्भ में पुस्तक की खासियतों में शामिल है।
लेखक ने यह भी कहा कि पुस्तक तैयार करते समय विषय की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्होंने शोध पर विशेष ध्यान दिया। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक राय के बजाय तथ्यों और अध्ययन के आधार पर सामग्री तैयार करने की कोशिश की है। यह लेखक का अपना वर्णन है; पुस्तक के निष्कर्षों का मूल्यांकन पाठकों और शोधकर्ताओं द्वारा अलग-अलग तरीके से किया जा सकता है।
नवीन किरण प्रधान इससे पहले ‘Rights of the Sikkimese’ और ‘I Can’t Bear the Cost of Petrol’ नाम की किताबें भी लिख चुके हैं। नई किताब के विमोचन के बाद इसके कार्यक्रम कालिम्पोंग, सिक्किम और सिलीगुड़ी में भी आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई है। इसे दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, सिलीगुड़ी और सिक्किम के बुकस्टोरों में उपलब्ध कराने की योजना है, जिसके बाद कोलकाता और दिल्ली में भी पहुंचाने की बात कही गई है।
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