गंगटोक: सिक्किम हाई कोर्ट में देश का 80वां स्वतंत्रता दिवस पूरे सम्मान और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर न्यायाधीशों, न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य गणमान्य लोगों ने शामिल होकर राष्ट्रध्वज को सलामी दी और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद किया।
समारोह के दौरान देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के संकल्प को दोहराया गया। न्यायपालिका से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि स्वतंत्रता केवल एक ऐतिहासिक उपलब्धि नहीं, बल्कि संविधान और कानून के प्रति जिम्मेदारी निभाने का अवसर भी है।
ध्वजारोहण के साथ हुई कार्यक्रम की शुरुआत
स्वतंत्रता दिवस समारोह की शुरुआत राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ हुई। इस दौरान राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया और उपस्थित लोगों ने तिरंगे को सलामी दी। कार्यक्रम में सिक्किम हाई कोर्ट के न्यायाधीशों ने स्वतंत्रता संग्राम के वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित की और देश के विकास में नागरिकों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
संविधान और न्याय के मूल्यों पर जोर
समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भारत का संविधान देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव है। न्यायपालिका की जिम्मेदारी है कि वह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करे और न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस हमें अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों की याद दिलाता है।
अधिकारियों और कर्मचारियों की रही भागीदारी
कार्यक्रम में हाई कोर्ट के अधिकारी, कर्मचारी और अन्य स्टाफ मौजूद रहे। सभी ने उत्साह के साथ स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लिया। इस दौरान देशभक्ति की भावना से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। उपस्थित लोगों ने राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देने का संकल्प लिया।
देशभक्ति के रंग में रंगा न्यायालय परिसर
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सिक्किम हाई कोर्ट परिसर को तिरंगे और देशभक्ति से जुड़े सजावटी तत्वों से सजाया गया। पूरे परिसर में उत्साह और गर्व का माहौल देखने को मिला। समारोह ने न्यायपालिका और समाज के बीच लोकतांत्रिक मूल्यों, कर्तव्य और राष्ट्रप्रेम के संबंध को और मजबूत करने का संदेश दिया।
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