Rajasthan: हाथ-पैर नहीं, घुटनों के बल दौड़ता है कृष्णा,पढ़ाई में भी अव्वल
Rajasthan राजस्थान: जिंदगी से हार मान लेने वालों के लिए राजस्थान के सुदूर आदिवासी जिले बांसवाड़ा का 10 वर्षीय कृष्णा मिसाल है। जन्म से ही उसके न हाथ हैं, न पैर, लेकिन वह हिम्मत और जज्बे से भरा है। कृष्णा पढ़ाई में अव्वल है और क्रिकेट का शौकीन है। उसका बल्ला चौके-छक्के लगाता है। अपने जज्बे से सबको प्रेरित करने वाला कृष्णा दोनों कोहनियों से कलम पकड़कर लिखता है और घुटनों पर चप्पल पहनकर चलता है।
कृष्ण छठी क्लास का होनहार छात्र है, उसने कभी स्कूल मिस नहीं किया। बारिश हो, गर्मी हो या कड़ाके की ठंड, वह पढ़ाई के लिए नियमित स्कूल पहुंचता था। कृष्णा का सपना बड़ा होकर शिक्षक के साथ-साथ क्रिकेटर बनने का है। कृष्णा बांसवाड़ा जिले की छोटी सरवन पंचायत समिति के खोरीपाड़ा गांव में रहता है। उसके पिता प्रभुलाल मईड़ा मजदूरी करते हैं।
हिम्मत नहीं हारी, घुटनों से चलने लगा
लकड़ी काटकर परिवार चलाने वाले प्रभुलाल के घर जब कृष्णा का जन्म हुआ तो खुशी के साथ गम भी था। बच्चे के न हाथ थे, न पैर, लेकिन उसकी मुस्कान इतनी प्यारी थी कि प्रभुलाल के सारे दुख दूर हो गए। उन्होंने उसका नाम कृष्णा रखा। परिजनों का कहना है कि कृष्णा का बचपन आसान नहीं था। जैसे-जैसे वह बड़ा होता गया, चुनौतियां बढ़ती गईं। वह भी सामान्य बच्चों की तरह खेलना और पढ़ना चाहता था, लेकिन उसकी शारीरिक स्थिति ने इसे मुश्किल बना दिया। फिर भी कृष्णा ने हिम्मत नहीं हारी। वह घुटनों के बल चलने लगा और चार साल की उम्र में स्कूल जाने लगा।
स्कूल में सबसे होशियार
परिजनों ने बताया कि कृष्णा पांच साल का था, जब उसकी मां का देहांत हो गया। अब उसके दादा उसे रोजाना सुबह दो किलोमीटर दूर पीएम श्री स्कूल छोटी सरवन छोड़ने जाते हैं। स्कूल खत्म होने पर वह अन्य बच्चों के साथ पैदल घर लौटता है। कृष्णा की शिक्षिका कहती हैं कि उसका होमवर्क कभी अधूरा नहीं रहता। वह हमेशा अपना काम समय पर पूरा करता है। उसके पिता सुबह जल्दी काम पर निकल जाते हैं, इसलिए कृष्णा खुद नहाकर तैयार होकर स्कूल के लिए निकल जाता है। उसकी मेहनत और लगन का नतीजा है कि वह क्लास के सबसे होशियार छात्रों में गिना जाता है।