जयपुर : नीट परीक्षा लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब देश के कई हिस्सों में फैलता जा रहा है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में भी शुक्रवार को बड़ी संख्या में छात्र और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी सड़क पर उतरे। जवाहर सर्कल स्थित पत्रिका गेट के पास छात्रों ने एकत्र होकर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों के हाथों में बैनर और तख्तियां थीं। छात्र नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और छात्रों ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की।
छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाएं लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी होती हैं। ऐसे में अगर पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती हैं तो मेहनत करने वाले छात्रों का विश्वास परीक्षा व्यवस्था से उठने लगता है। प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने कहा कि सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे किसी भी परीक्षा में गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे और दोषियों पर तत्काल कार्रवाई हो।
गौरतलब है कि नीट परीक्षा लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में छात्र संगठन और युवा समूह 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन को कई राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, छात्र समूहों और अन्य क्षेत्रों से जुड़े लोगों का समर्थन मिल रहा है। प्रदर्शनकारी लंबे समय से परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
इसी बीच राजस्थान के दो युवा नेताओं ने भी दिल्ली पहुंचकर आंदोलन कर रहे छात्रों का समर्थन किया। बाड़मेर जिले के शिव विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी और राजस्थान विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष निर्मल चौधरी जंतर-मंतर पहुंचे। दोनों नेताओं ने प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की और उनकी मांगों का समर्थन किया।
दोनों नेताओं ने केंद्र सरकार से अपील की कि छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाए। उनका कहना था कि युवाओं का भरोसा बनाए रखने के लिए परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाना जरूरी है।
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन और तेज हो गया था। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया था कि संसद की ओर मार्च करने के दौरान पुलिस और आरएएफ ने बल प्रयोग किया। इसके बाद देश के अन्य हिस्सों में भी छात्रों के बीच नाराजगी बढ़ी और अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन शुरू हुए।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी परीक्षा सुधारों और अन्य मांगों को लेकर चल रही अपनी 26 दिन की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त कर दी। केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह से बातचीत के बाद उन्होंने जूस पीकर अपना अनशन खत्म किया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा कि सरकार परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी कदम उठा रही है। उन्होंने सख्त कानूनी प्रावधान, पेपर लीक मामलों के लिए तेज सुनवाई और परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने जैसे उपायों का उल्लेख किया।
वहीं छात्रों का कहना है कि केवल घोषणाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर ठोस कदम उठाने होंगे। उनका कहना है कि जब तक पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक युवाओं का भरोसा पूरी तरह बहाल नहीं हो पाएगा।
नीट पेपर लीक का मुद्दा अब केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है। राजस्थान सहित कई राज्यों में छात्रों के प्रदर्शन से साफ है कि युवा इस मुद्दे पर सरकार से ठोस और प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।