Rajasthan राजस्थान। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दिवाली के पावन अवसर पर बच्चों और समाज के वंचित वर्गों के बीच उपहार वितरित कर शहरवासियों के दिलों में खुशियों की लहर फैला दी। ओम बिरला ने आरके पुरम मार्बल चौराहे पर स्थानीय बच्चों को मिठाई, किताबें और खिलौने वितरित किए, ताकि त्योहार का आनंद हर बच्चे तक पहुंचे। इस अवसर पर उन्होंने केवल बच्चों को ही नहीं, बल्कि वहां मौजूद मजदूरों और उनके परिवारों से भी बातचीत की। उन्होंने उनके जीवन की परिस्थितियों को समझा और उनके सवालों को धैर्यपूर्वक सुना। उन्होंने कहा कि समाज के हर व्यक्ति का भला करना और उनकी आवश्यकताओं को समझना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
ओम बिरला ने बच्चों से संवाद करते हुए कहा कि दिवाली केवल रोशनी और पटाखों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह आपसी भाईचारा, साझा खुशियाँ और एक-दूसरे की मदद का प्रतीक भी है। उन्होंने कहा कि हर बच्चा और हर परिवार त्योहार का आनंद महसूस कर सके, इसके लिए समाज के समस्त वर्गों का सहयोग आवश्यक है। इस दौरान उन्होंने मजदूरों से कहा कि उनका कठिन परिश्रम समाज के विकास और हमारी संस्कृति के आधार का हिस्सा है। उन्होंने उन्हें आश्वासन दिया कि सरकार और समाज उनके कल्याण और सुरक्षा के लिए हमेशा प्रयासरत रहेगा। ओम बिरला ने स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग की भी सराहना की, जिन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
स्थानीय लोगों ने बताया कि ओम बिरला का यह प्रयास बच्चों और परिवारों के बीच उत्साह और खुशियों का माहौल बनाने में सफल रहा। बच्चों ने खिलौनों और मिठाईयों के साथ-साथ ओम बिरला के साथ तस्वीरें खिंचाई और उनकी बातों से प्रेरणा भी ली। इस अवसर पर स्वास्थ्य और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया। सभी बच्चों और उपस्थित लोगों के लिए सैनिटाइजेशन और सामाजिक दूरी का पालन सुनिश्चित किया गया। प्रशासन ने सुरक्षा कर्मियों को भी तैनात किया ताकि कार्यक्रम सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के आयोजन न केवल बच्चों और वंचित वर्ग के लिए खुशी और उत्साह का कारण बनते हैं, बल्कि यह सामाजिक एकता और मानवता की भावना को भी मजबूत करते हैं। ऐसे आयोजनों से समाज के कमजोर वर्गों में उत्साह और आत्मविश्वास का संचार होता है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने यह भी कहा कि इस दिवाली, बच्चों को शिक्षा, खेलकूद और मनोरंजन के साधनों तक पहुंच प्रदान करना भी आवश्यक है। उन्होंने सभी समाजसेवियों और नागरिकों से अपील की कि वे बच्चों और समाज के कमजोर वर्गों की मदद करें और उनके जीवन को खुशहाल बनाने के प्रयास में सहयोग दें। इस आयोजन के माध्यम से यह संदेश गया कि दिवाली केवल व्यक्तिगत खुशी का पर्व नहीं, बल्कि समाज के सभी वर्गों के लिए समान अवसर और खुशियाँ बाँटने का पर्व है। कोटा के बच्चों और परिवारों के चेहरे पर उत्साह और खुशी देखकर यह स्पष्ट हो गया कि ओम बिरला का यह प्रयास सफल रहा।
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