कोटा। राजस्थान में सरकारी सेवा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। राज्य सरकार ने कोटा में पदस्थ शारीरिक शिक्षक मंदोदरी चौधरी के आवेदन पर सेवा रिकॉर्ड में नाम और लिंग परिवर्तन की अनुमति दे दी है। निर्धारित विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सरकारी दस्तावेजों में उनका नाम 'रुद्र जाट' और लिंग 'पुरुष' दर्ज किया जाएगा। यह फैसला सरकारी कर्मचारियों के सेवा अभिलेखों में लैंगिक पहचान से जुड़े बदलावों की प्रक्रिया के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस मामले में संबंधित शिक्षक ने अपनी पहचान के अनुरूप सरकारी रिकॉर्ड में संशोधन की मांग की थी। आवेदन पर विचार करने के बाद राज्य सरकार ने नाम और लिंग से संबंधित प्रविष्टियों में बदलाव की अनुमति प्रदान की है। इससे अब सेवा पुस्तिका और अन्य संबंधित विभागीय अभिलेखों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संशोधन किया जा सकेगा।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि सरकारी सेवा में नियुक्ति के समय दर्ज व्यक्तिगत विवरण बाद में बदलने के लिए प्रशासनिक और कानूनी औपचारिकताओं का पालन करना पड़ता है। नाम और लिंग से जुड़ा संशोधन केवल पहचान का विषय नहीं होता, बल्कि उसका संबंध कर्मचारी के वेतन, पेंशन, नियुक्ति विवरण और अन्य सेवा संबंधी दस्तावेजों से भी हो सकता है।
कोटा के सरकारी विद्यालय में पदस्थ हैं रुद्र जाट
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रुद्र जाट कोटा के नांता महल स्थित राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय में शारीरिक शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने अपनी लैंगिक पहचान के अनुरूप नाम और लिंग की प्रविष्टि बदलवाने के लिए राजस्थान सरकार के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था।
आवेदन में सरकारी सेवा से जुड़े अभिलेखों में पहले दर्ज नाम मंदोदरी चौधरी को बदलकर रुद्र जाट करने और लिंग की श्रेणी महिला से पुरुष करने की अनुमति मांगी गई थी। शिक्षा विभाग ने इस आवेदन पर विचार करते हुए आवश्यक कानूनी शर्तों के अधीन संशोधन की स्वीकृति दी है।
28 अक्टूबर को जारी हुआ स्वीकृति आदेश
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर की ओर से 28 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया गया। शिक्षा विभाग के आदेशों की सूची में भी शारीरिक शिक्षक मंदोदरी चौधरी के नाम और लिंग परिवर्तन की स्वीकृति दर्ज है।
रिपोर्टों के अनुसार, माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार ने विभागीय स्तर पर अनुमति जारी की। आदेश के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित सेवा अभिलेखों में नया नाम और लिंग दर्ज किया जाएगा।यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सरकारी अनुमति मिलने और सभी विभागीय रिकॉर्ड में संशोधन पूरा हो जाने की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में हो सकती है।
राजस्थान सेवा नियमों के तहत किया आवेदन
रुद्र जाट ने नाम और लिंग परिवर्तन की अनुमति के लिए राजस्थान सेवा नियमों के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत आवेदन किया था। इसके साथ ही ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 और उससे जुड़े नियमों का पालन भी महत्वपूर्ण है।इन कानूनी प्रावधानों का उद्देश्य ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करना और उनकी लैंगिक पहचान को मान्यता देने की व्यवस्था उपलब्ध कराना है।किसी सरकारी कर्मचारी के नाम और लिंग की प्रविष्टि में संशोधन करते समय संबंधित विभाग को दस्तावेजों की वैधता, आवश्यक प्रमाणपत्र और निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया का ध्यान रखना होता है।इस मामले में भी शिक्षा विभाग ने कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने की शर्त के साथ अनुमति दी है।
सरकारी दस्तावेजों में अब दर्ज होगी नई पहचान
शिक्षा विभाग की मंजूरी के बाद रुद्र जाट के सेवा रिकॉर्ड में आवश्यक संशोधन किए जा सकेंगे। इनमें सेवा पुस्तिका, विभागीय पत्राचार और अन्य संबंधित अभिलेख शामिल हो सकते हैं।सरकारी कर्मचारी की सेवा पुस्तिका एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है। इसमें नियुक्ति, पदस्थापना, वेतन, पदोन्नति, अवकाश और अन्य सेवा संबंधी जानकारियां दर्ज रहती हैं।ऐसे में नाम और लिंग की प्रविष्टि बदलने के दौरान यह सुनिश्चित करना जरूरी होता है कि पुराने और संशोधित रिकॉर्ड के बीच निरंतरता बनी रहे। इससे भविष्य में कर्मचारी को सेवा संबंधी लाभ प्राप्त करने में दस्तावेजी असंगतियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।रिपोर्टों के अनुसार, कोटा के संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों ने भी विभागीय आदेश जारी होने की पुष्टि की है।
लैंगिक पहचान को कानूनी मान्यता देने का महत्वपूर्ण पहलू
भारत में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की लैंगिक पहचान को लेकर कानूनी और सामाजिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2014 के ऐतिहासिक नालसा फैसले में व्यक्ति की स्व-पहचानी लैंगिक पहचान को गरिमा और मौलिक अधिकारों से जुड़ा विषय माना था।इसके बाद ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के माध्यम से भेदभाव के विरुद्ध कानूनी संरक्षण और पहचान संबंधी प्रक्रियाओं की व्यवस्था की गई।किसी व्यक्ति की लैंगिक पहचान को सरकारी दस्तावेजों में सही रूप से दर्ज करना उसके रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।रुद्र जाट का मामला इसी व्यापक कानूनी व्यवस्था के अंतर्गत सामने आया है।
पहले भी राजस्थान में सामने आ चुका है ऐसा मामला
राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों के नाम और लिंग परिवर्तन से जुड़ा यह पहला मामला नहीं है। वर्ष 2023 में शारीरिक शिक्षक चिंदर पाल सिंह से जुड़े मामले में भी राजस्थान हाईकोर्ट के समक्ष नाम और लिंग परिवर्तन का प्रश्न आया था।
रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2018 में शिक्षा विभाग के समक्ष आवेदन दिया था। आवेदन पर कार्रवाई नहीं होने के बाद मामला अदालत पहुंचा और राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने 25 मई 2023 को उनके पक्ष में फैसला सुनाया।इससे स्पष्ट होता है कि सरकारी सेवा अभिलेखों में लैंगिक पहचान के अनुरूप संशोधन का प्रश्न पहले भी न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर उठ चुका है।
राजस्थान में पहचान प्रमाणपत्रों की संख्या बढ़ी
राजस्थान में ट्रांसजेंडर पहचान प्रमाणपत्रों से जुड़े आंकड़ों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2023 तक राज्य में 238 प्रमाणपत्र जारी हुए थे। सितंबर 2026 तक इनकी संख्या बढ़कर 731 हो गई।इस अवधि में प्रमाणपत्रों की संख्या में 493 की वृद्धि हुई। हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर किसी व्यक्ति की निजी परिस्थितियों के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।यह बढ़ोतरी पहचान संबंधी कानूनी प्रक्रियाओं के इस्तेमाल में वृद्धि को दर्शाती है।
फैसले के बाद अब विभागीय प्रक्रिया पर नजर
रुद्र जाट के आवेदन को मंजूरी मिलने के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण संबंधित सरकारी अभिलेखों में संशोधन का है। शिक्षा विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्धारित दस्तावेजी औपचारिकताओं के बाद सेवा संबंधी रिकॉर्ड में सही जानकारी दर्ज हो।
यह मामला सरकारी सेवा में कार्यरत व्यक्तियों की लैंगिक पहचान और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बीच समन्वय का उदाहरण है। इससे यह भी सामने आता है कि नाम और लिंग परिवर्तन के मामलों में स्पष्ट नियमों तथा समयबद्ध विभागीय कार्रवाई का कितना महत्व है।
Tags: