जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर में मधुमक्खियों के झुंड ने ऐसा आतंक मचाया कि सड़क पर चल रहे लोगों को अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागना पड़ा। पांच बत्ती चौराहे से एयरपोर्ट रोड की ओर जाने वाले मार्ग पर पाबूपुरा के पास अचानक मधुमक्खियों का एक बड़ा छत्ता टूटकर नीचे गिर गया। इसके बाद छत्ते से निकली हजारों मधुमक्खियों ने राहगीरों और आसपास मौजूद लोगों पर हमला बोल दिया। अचानक हुए इस हमले से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। लोग खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। इस घटना में 15 से 20 लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। मधुमक्खियों के डंक से गंभीर रूप से घायल एक बुजुर्ग की इलाज के दौरान मौत हो गई।
यह घटना शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को सामने आई। हादसे के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। घटना ने शहर में सार्वजनिक स्थानों पर मौजूद बड़े मधुमक्खी के छत्तों और लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छत्ते के नीचे गिरते ही लोगों पर टूट पड़ा मधुमक्खियों का झुंड
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार दोपहर एयरफोर्स स्टेशन से पांच बत्ती की ओर जाने वाली सड़क पर पाबूपुरा के नजदीक मधुमक्खियों का बड़ा छत्ता अचानक भरभराकर नीचे गिर गया। छत्ता गिरते ही उसमें मौजूद मधुमक्खियां चारों तरफ फैल गईं। आसपास से गुजर रहे राहगीरों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। मधुमक्खियों ने लोगों के चेहरे, सिर, गर्दन और शरीर के दूसरे हिस्सों पर डंक मारना शुरू कर दिया।
अचानक हुए हमले से सड़क पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। लोग खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कुछ लोगों ने आसपास की दुकानों और सुरक्षित स्थानों में छिपकर अपनी जान बचाई। वहीं, कई लोग मधुमक्खियों के डंक से बुरी तरह घायल हो गए। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया।
इलाज के दौरान बुजुर्ग किशनलाल ने तोड़ा दम
इस हमले में सबसे दुखद घटना एक बुजुर्ग की मौत रही। रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक की पहचान किशनलाल के रूप में हुई है। बताया गया कि वह घटना के समय सड़क से गुजर रहे थे, तभी मधुमक्खियों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया। डंक लगने से उनकी तबीयत गंभीर हो गई।
आनन-फानन में उन्हें उपचार के लिए जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उनकी मौत की खबर से परिजनों में शोक छा गया। इस हादसे ने एक बार फिर शहर के सार्वजनिक रास्तों पर मौजूद मधुमक्खियों के बड़े छत्तों से होने वाले खतरे को उजागर कर दिया है।
दूसरे दिन भी जारी रहा मधुमक्खियों का आतंक
शुक्रवार की घटना के बाद भी एयरपोर्ट रोड पर मधुमक्खियों का खतरा खत्म नहीं हुआ। शनिवार, 31 अक्टूबर की सुबह इसी इलाके में मधुमक्खियों ने एक बार फिर राहगीरों को निशाना बनाया। इस ताजा हमले में करीब 4 से 5 लोगों के घायल होने की सूचना सामने आई। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।
NDTV राजस्थान की रिपोर्ट के अनुसार, लगातार दो दिनों में मधुमक्खियों के हमलों से करीब 15 से 20 लोग प्रभावित हुए हैं। यानी यह केवल एक बार हुई घटना नहीं रही, बल्कि लगातार दूसरे दिन भी लोगों की सुरक्षा पर खतरा बना रहा।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
लगातार दो दिनों तक हुई घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है। उनका आरोप है कि पहले दिन एक व्यक्ति की मौत और कई लोगों के घायल होने के बावजूद मधुमक्खियों के छत्तों को हटाने या खतरे को नियंत्रित करने के लिए समय रहते स्थायी कदम नहीं उठाए गए।
लोगों का कहना है कि एयरपोर्ट रोड पर रोजाना बड़ी संख्या में वाहन और राहगीर गुजरते हैं। ऐसे व्यस्त मार्ग पर मधुमक्खियों के बड़े छत्ते मौजूद रहना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में भी ऐसी घटनाएं हो सकती हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इलाके में मौजूद मधुमक्खियों के छत्तों की पहचान कर विशेषज्ञों की मदद से उन्हें सुरक्षित तरीके से हटाया जाए। साथ ही लोगों को संभावित खतरे के बारे में जागरूक किया जाए।
प्रशासन के सामने अब स्थायी समाधान की चुनौती
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहर के व्यस्त मार्गों पर मौजूद मधुमक्खियों के छत्तों को लेकर जिम्मेदारी किसकी है और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। मधुमक्खियां पर्यावरण और कृषि के लिए बेहद उपयोगी हैं, लेकिन जब उनके बड़े छत्ते भीड़भाड़ वाले इलाकों में होते हैं और किसी कारण से उनका झुंड आक्रामक हो जाता है, तो लोगों की जान पर खतरा पैदा हो सकता है।
विशेषज्ञों की मदद से ऐसे छत्तों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करना जरूरी है। इसके लिए प्रशिक्षित मधुमक्खी पालकों और संबंधित बचाव दल की सहायता ली जानी चाहिए। आम लोगों को भी किसी छत्ते के पास पत्थर फेंकने, धुआं करने या उसे छेड़ने से बचना चाहिए।
मधुमक्खियों के हमले की स्थिति में लोगों को झुंड से दूर किसी बंद सुरक्षित स्थान पर पहुंचना चाहिए और गंभीर लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। विशेष रूप से सांस लेने में परेशानी, चक्कर या चेहरे और गले में सूजन होने पर इसे मेडिकल इमरजेंसी मानना चाहिए।
जोधपुर की यह घटना बताती है कि सार्वजनिक स्थानों पर छोटी दिखने वाली लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। एक बुजुर्ग की मौत के बाद अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि एयरपोर्ट रोड पर दोबारा ऐसी घटना न हो और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।