हनुमानगढ़। राजस्थान में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित नशीली दवाओं की तस्करी और बिक्री से जुड़े नेटवर्क पर शिकंजा कसा है। हनुमानगढ़ जिले में पुलिस ने दो अलग-अलग कार्रवाइयों के दौरान करीब 55 लाख रुपये कीमत की 14 हजार प्रतिबंधित नशीली टैबलेट और कैप्सूल जब्त किए हैं। इस कार्रवाई में जंक्शन और टाउन थाना पुलिस ने कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एक साथ दो थाना क्षेत्रों में हुई इस कार्रवाई से नशीली दवाओं के अवैध कारोबार में शामिल लोगों में हड़कंप मच गया है।
पुलिस की इन कार्रवाइयों को जिले में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। बड़ी संख्या में नशीली गोलियों और कैप्सूल की बरामदगी से इस अवैध कारोबार के फैलाव को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है, ताकि पता लगाया जा सके कि प्रतिबंधित दवाओं की खेप कहां से लाई गई थी और इसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।
दो अलग-अलग मामलों में हुई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, हनुमानगढ़ पुलिस ने नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ अलग-अलग थाना क्षेत्रों में कार्रवाई की। पहली कार्रवाई जंक्शन थाना पुलिस की ओर से की गई, जबकि दूसरी कार्रवाई टाउन थाना पुलिस ने की। दोनों कार्रवाइयों में पुलिस को प्रतिबंधित नशीली टैबलेट और कैप्सूल की खेप बरामद करने में सफलता मिली।इन मामलों में पुलिस ने कुल 14 हजार टैबलेट और कैप्सूल जब्त किए हैं। बरामद दवाओं की अनुमानित कीमत करीब 55 लाख रुपये बताई गई है। दोनों मामलों में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस की जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि आरोपी इन दवाओं को कहां से खरीदते थे और इनके जरिए जिले में किन-किन स्थानों पर सप्लाई की जा रही थी। इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस कारोबार में उनके साथ दूसरे लोग भी शामिल हैं या नहीं।
नशे के कारोबार में इस्तेमाल हो रही प्रतिबंधित दवाएं
नशीली दवाओं का अवैध कारोबार केवल पारंपरिक मादक पदार्थों तक सीमित नहीं है। कुछ लोग दवाइयों का इस्तेमाल भी नशे के विकल्प के रूप में करते हैं। कुछ प्रतिबंधित या नियंत्रित दवाओं का गलत तरीके से सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।ऐसी दवाओं को बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे और निर्धारित नियमों के विपरीत बेचना या वितरित करना कानून के दायरे में कार्रवाई का कारण बन सकता है। नशीली दवाओं की अवैध बिक्री से युवाओं और अन्य लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।इसी वजह से पुलिस और संबंधित विभाग समय-समय पर मेडिकल स्टोर, संदिग्ध गोदामों और दवाइयों की अवैध सप्लाई से जुड़े ठिकानों पर निगरानी रखते हैं।
सप्लाई नेटवर्क का पता लगाने में जुटी पुलिस
चार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रतिबंधित दवाओं के पूरे नेटवर्क का पता लगाना है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि दवाओं की खरीद कहां से हुई, इनकी सप्लाई के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल किया गया और किन ग्राहकों तक इन्हें पहुंचाया जाना था।
पुलिस यह भी जांच कर सकती है कि आरोपियों के पास से बरामद दवाओं के संबंध में कोई वैध खरीद दस्तावेज, लाइसेंस या चिकित्सकीय अनुमति मौजूद थी या नहीं। प्रतिबंधित दवाओं के कारोबार में यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुई बरामदगी से पुलिस को जिले में सक्रिय नशीली दवाओं के नेटवर्क की पड़ताल करने का आधार मिला है।
युवाओं को नशे से बचाना पुलिस के लिए चुनौती
राजस्थान के सीमावर्ती हनुमानगढ़ जिले में नशे के अवैध कारोबार पर नियंत्रण प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है। नशे की लत के कारण युवाओं का भविष्य प्रभावित होता है। इसके साथ ही परिवारों और समाज पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बिना डॉक्टर की सलाह के नशीली या मन को प्रभावित करने वाली दवाओं का सेवन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। ऐसी दवाओं की लत पड़ने पर व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।नशे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए केवल आरोपियों को गिरफ्तार करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि दवाओं की अवैध सप्लाई के स्रोत और वितरण नेटवर्क को भी खत्म करना जरूरी है।
55 लाख की बरामदगी के बाद आगे की जांच जारी
हनुमानगढ़ में जंक्शन और टाउन थाना पुलिस की अलग-अलग कार्रवाई में 14 हजार प्रतिबंधित नशीली टैबलेट-कैप्सूल की बरामदगी को बड़ी सफलता माना जा रहा है। करीब 55 लाख रुपये की दवाओं के साथ चार आरोपियों की गिरफ्तारी ने नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को चर्चा में ला दिया है।
फिलहाल पुलिस दोनों मामलों में आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच के दौरान दवाओं के स्रोत, संभावित खरीदारों और सप्लाई नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। आने वाले दिनों में पूछताछ के आधार पर इस कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही दोनों मामलों से जुड़े पूरे नेटवर्क और दवाओं की सप्लाई के तरीके का खुलासा हो सकेगा।