Bundi बूंदी । बाल श्रम और बाल विवाह जैसी गंभीर सामाजिक समस्याओं के खिलाफ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से बाल अधिकारिता, एक्शन एड-यूनिसेफ व चाईल्डलाइन द्वारा महिला एव बाल विकास के सहयोग से बाल श्रम और बाल विवाह रोकथाम विषय पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ बुधवार को जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में समाज के विभिन्न हिस्सों से संबंधित कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और इन गंभीर समस्याओं से निपटने के लिए विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक हुकुमचंद जाजोरिया ने बताया कि जागरूकता सत्र का मुख्य उद्देश्य बच्चों को श्रम के बजाय शिक्षा प्राप्त करने के अधिकार एवं बाल विवाह की गंभीरता के प्रति जागरूक करना था। इस सत्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बाल श्रम के खिलाफ सरकारी नीतियों और उपायों के बारे में जानकारी दी गई, ताकि वे अपने समुदाय में बच्चों को स्कूल भेजने के महत्व को प्रचारित कर सकें।
बाल संरक्षण अधिकारी गोविंद कुमार गौतम ने जानकारी देते हुए बताया कि बाल विवाह बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए हानिकारक है और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करता है। इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बाल विवाह के खतरों के बारे में बताया गया और यह समझाया गया कि शिक्षा, जागरूकता और समाजिक समर्थन से ही इस कुप्रथा को समाप्त किया जा सकता है।
सत्र के दौरान एक्शन एड-यूनिसेफ जिला समन्वयक जहीर आलम ने विचार व्यक्त किए और कहा कि बाल श्रम और बाल विवाह को रोकने के लिए सिर्फ कानूनी कदम ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज में जागरूकता और बदलाव लाना आवश्यक है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अपने समुदाय में बच्चों को इन समस्याओं के बारे में शिक्षित करने और उन्हें इसके खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया गया।
इस दौरान बाल अधिकारिता ओडब्लू दीपिका वशिष्ठ ने आंगनबाड़ी कार्यक्रताओं को प्रेरित करते हुए कहा कि हम सब की नैतिक जिम्मेदारी है कि हम बालकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करें और उन्हें एक बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा और सुरक्षा प्रदान करें। निश्चित रूप से यह सत्र हमें अपने समाज में इन कुप्रथाओं को खत्म करने का एक प्रभावी उपाय खोजने में मदद करेगा।
इस अवसर पर चाइल्ड हेल्पलाइन से पारिता शर्मा व अर्चना मीणा ने चाइल्ड हेल्पलाइन की विस्तृत जानकारी दी।