जयपुर : 27 अक्टूबर 2026। देश में लंबे समय से लंबित अंतरराज्यीय जल विवादों और समझौतों के समाधान की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण प्रगति का दावा किया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने मंगलवार को कहा कि आपसी सहमति, समन्वय, सहयोग और विश्वास के माध्यम से दशकों से लंबित जल समझौते अब ठोस रूप ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में राज्यों के बीच जल संसाधनों के न्यायसंगत और बेहतर उपयोग के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार हुआ है।
नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की 15वीं समीक्षा बैठक आयोजित
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में मंगलवार को नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की समीक्षा समिति की 15वीं बैठक आयोजित हुई।बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने भाग लिया।बैठक में राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। इस दौरान नर्मदा जल के उपयोग, लंबित समझौतों और विभिन्न राज्यों के बीच सहयोग को लेकर चर्चा हुई।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन तभी संभव है, जब सभी राज्य आपसी विश्वास और सहयोग की भावना से काम करें।
चार राज्यों के बीच जल समझौते पर जोर
सीआर पाटिल ने बताया कि 7 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच हुए समझौते को प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित मुद्दों का समाधान संवाद और सहयोग के माध्यम से संभव हुआ है।केंद्रीय मंत्री के अनुसार, अंतरराज्यीय जल विवादों के समाधान में सहकारी संघवाद की महत्वपूर्ण भूमिका है। केंद्र सरकार राज्यों के बीच समन्वय स्थापित कर जल संसाधनों के बेहतर उपयोग को प्राथमिकता दे रही है।
राजस्थान में अधिशेष नर्मदा जल के भंडारण की तैयारी
बैठक को संबोधित करते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार नर्मदा नदी के अधिशेष जल का बेहतर उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है।उन्होंने बताया कि मानसून के दौरान उपलब्ध अतिरिक्त पानी को संग्रहित करने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है।इस योजना का उद्देश्य बारिश के मौसम में उपलब्ध अतिरिक्त पानी को संरक्षित कर जल संकट से प्रभावित क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करना है।मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिमी राजस्थान में पेयजल और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
जालोर और बाड़मेर में सिंचाई को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नर्मदा नहर परियोजना को जल प्रबंधन का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।उन्होंने कहा कि राजस्थान के जालोर और बाड़मेर जिलों में नर्मदा नहर परियोजना के तहत आधुनिक सिंचाई तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।परियोजना के कमांड क्षेत्र में फव्वारा सिंचाई प्रणाली अपनाई गई है, जिससे पानी के अपव्यय को कम करने में सहायता मिलती है।राज्य सरकार के अनुसार, लगभग 2.46 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य कमांड क्षेत्र में निर्धारित 40 प्रतिशत सिंचाई सघनता का लक्ष्य प्राप्त किया जा रहा है।इस व्यवस्था से किसानों को उपलब्ध पानी का अधिक कुशलता से उपयोग करने में मदद मिल रही है।
रामजल सेतु और यमुना जल समझौते का भी उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार और पड़ोसी राज्यों के सहयोग से राजस्थान में जल संसाधनों के विकास की नई संभावनाएं बनी हैं।उन्होंने रामजल सेतु लिंक परियोजना और यमुना जल समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों से राज्य के जल संकटग्रस्त क्षेत्रों में पेयजल और सिंचाई की व्यवस्था बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।इससे पहले केंद्र सरकार की मध्यस्थता में विभिन्न राज्यों के बीच जल बंटवारे से जुड़े समझौते भी हुए हैं।अगस्त 2026 में बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे।
किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों को लाभ पहुंचाने पर जोर
जल शक्ति मंत्रालय का उद्देश्य जल संसाधनों का ऐसा उपयोग सुनिश्चित करना है, जिससे किसानों, ग्रामीण परिवारों और औद्योगिक क्षेत्रों की आवश्यकताएं पूरी हो सकें।विशेषज्ञों के अनुसार, राज्यों के बीच जल वितरण संबंधी विवादों का समाधान सिंचाई परियोजनाओं और पेयजल योजनाओं के क्रियान्वयन में सहायक हो सकता है।हालांकि, समझौतों का वास्तविक लाभ परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन, उपलब्ध जल की मात्रा और वितरण व्यवस्था पर निर्भर करेगा।केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि आपसी सहमति और विश्वास से जटिल जल मुद्दों का समाधान संभव है। उन्होंने राज्यों के बीच सहयोग को आगे भी मजबूत बनाए रखने पर जोर दिया।