राजस्थान : सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। राज्य सरकार ने विधानसभा में जानकारी दी है कि प्रदेश के 611 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास अपना खुद का भवन नहीं है। इनमें 10 बालिका विद्यालय भी शामिल हैं। यह जानकारी शुक्रवार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में सामने आई।
सरकार की ओर से बताया गया कि यह आंकड़ा वर्ष 2025-26 के यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (UDISE) के आंकड़ों और समग्र शिक्षा अभियान के तहत उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल अभी भी स्थायी भवन की सुविधा से वंचित हैं।
शिक्षा व्यवस्था में स्कूल भवन को सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधाओं में शामिल किया जाता है। विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक भवन की आवश्यकता होती है। लेकिन राजस्थान के सैकड़ों सरकारी स्कूलों के पास खुद का भवन नहीं होना शिक्षा क्षेत्र में मौजूद चुनौतियों को उजागर करता है।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली ने सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर सरकार से सवाल किया था। उन्होंने प्रदेश में बिना भवन वाले स्कूलों की संख्या, इनमें पढ़ने वाले विद्यार्थियों की स्थिति और सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मांगी थी। जवाब में सरकार ने बताया कि राज्य में 611 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां अभी तक स्थायी भवन उपलब्ध नहीं है।
इन स्कूलों में 10 बालिका विद्यालय भी शामिल हैं। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन बालिका विद्यालयों के पास अपना भवन नहीं होना चिंता का विषय माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्कूल भवन और अन्य सुविधाओं की कमी का असर छात्राओं की उपस्थिति और पढ़ाई के माहौल पर पड़ सकता है।
सरकार ने बताया कि स्कूलों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। समग्र शिक्षा अभियान के तहत स्कूलों में भवन निर्माण, अतिरिक्त कक्षों का निर्माण और अन्य आधारभूत सुविधाओं को विकसित करने का काम किया जाता है। हालांकि, बड़ी संख्या में स्कूलों के पास अभी भी अपनी इमारत नहीं होना चुनौती बनी हुई है।
राजस्थान देश के बड़े राज्यों में शामिल है, जहां ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल संचालित होते हैं। कई स्थानों पर स्कूल किराए के भवनों, अस्थायी संरचनाओं या अन्य सरकारी भवनों में संचालित किए जा रहे हैं। ऐसे स्कूलों में विद्यार्थियों और शिक्षकों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों के पास अपना भवन होने से पढ़ाई का माहौल बेहतर होता है। स्थायी भवन में कक्षाओं के संचालन के साथ-साथ पुस्तकालय, प्रयोगशाला, खेल सुविधाएं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों को भी बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकता है। इसके अलावा बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से भी स्कूल भवन जरूरी है।
विधानसभा में सामने आए आंकड़ों के बाद सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्ष ने इसे राज्य की शिक्षा नीति और सरकारी स्कूलों की स्थिति से जोड़ते हुए सरकार से जल्द सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि जब सरकार शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात करती है, तब इतने बड़े पैमाने पर स्कूलों का बिना भवन के संचालन चिंता का विषय है।
हालांकि, सरकार का कहना है कि स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। जिन स्कूलों के पास भवन नहीं हैं, वहां आवश्यकता और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर भवन निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
फिलहाल, राजस्थान के 611 सरकारी स्कूलों का मामला राज्य की शिक्षा व्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन स्कूलों को स्थायी भवन उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाती है और कितनी तेजी से इस दिशा में काम पूरा किया जाता है।