वोट डालने पहुंचे अशोक गहलोत के पैर छूने पर विवाद भाजपा ने उठाए निष्पक्षता पर सवाल
जोधपुर। राजस्थान में निकाय चुनाव के दूसरे चरण के लिए जारी मतदान के बीच जोधपुर के एक मतदान केंद्र पर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। भारतीय जनता पार्टी ने दावा किया है कि मतदान कराने के लिए तैनात कर्मचारियों में शामिल एक सदस्य ने वोट डालने पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पैर छुए। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मतदान कर्मी के व्यवहार और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सियासी बयानबाजी शुरू हो गई है।
जानकारी के अनुसार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत शुक्रवार को जोधपुर के वार्ड संख्या 82 में मतदान करने पहुंचे थे। उनका मतदान केंद्र महामंदिर क्षेत्र के वर्धमान जैन स्कूल में बनाया गया था। गहलोत जैसे ही मतदान केंद्र के अंदर पहुंचे तभी वहां मौजूद पोलिंग स्टाफ के एक सदस्य ने कथित तौर पर उनके पैर छुए। इस दौरान मौजूद किसी व्यक्ति ने घटना का वीडियो बना लिया जो बाद में सामने आया।
वीडियो प्रसारित होने के बाद भाजपा ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताई। पार्टी का कहना है कि चुनाव ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी को मतदान केंद्र के अंदर पूरी तरह निष्पक्ष दिखाई देना चाहिए। किसी राजनीतिक नेता के प्रति इस तरह सम्मान प्रकट करने से मतदाताओं के बीच गलत संदेश जा सकता है। भाजपा ने इसे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और मर्यादा से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।
भाजपा नेताओं के अनुसार मतदान केंद्र ऐसा स्थान है जहां प्रत्येक राजनीतिक दल और उम्मीदवार को समान दृष्टि से देखा जाना चाहिए। वहां तैनात अधिकारी और कर्मचारी निर्वाचन व्यवस्था का हिस्सा होते हैं। इसलिए उनका व्यवहार ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे किसी विशेष दल अथवा नेता के प्रति व्यक्तिगत झुकाव का संकेत मिले। पार्टी ने घटना पर निर्वाचन अधिकारियों से संज्ञान लेने और संबंधित कर्मचारी की भूमिका की जांच करने की मांग की है।
भाजपा की ओर से मामले को चुनाव आयोग तक ले जाने और शिकायत दर्ज कराने की बात भी सामने आई है। पार्टी ने मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता और शुचिता पर सवाल उठाते हुए संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध उचित कदम उठाने की मांग की है। हालांकि वीडियो में दिखाई देने वाले व्यवहार के पीछे कर्मचारी की मंशा क्या थी यह निर्वाचन अधिकारियों की जांच और संबंधित पक्ष का स्पष्टीकरण सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा। नवभारत टाइम्स
घटना को लेकर कांग्रेस की विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। यह भी साफ नहीं हुआ है कि अशोक गहलोत ने उस समय कर्मचारी के व्यवहार पर कोई प्रतिक्रिया दी थी या नहीं। पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से विवाद को लेकर औपचारिक बयान सामने आने पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल भाजपा वायरल वीडियो को आधार बनाकर निर्वाचन व्यवस्था पर सवाल उठा रही है।
राजस्थान में निकाय चुनाव के दूसरे चरण का मतदान राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय निकायों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए भाजपा और कांग्रेस ने पूरी ताकत लगाई है। ऐसे माहौल में मतदान केंद्र पर हुई छोटी-सी गतिविधि भी राजनीतिक विवाद का रूप ले सकती है। गहलोत प्रदेश कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं इसलिए उनसे जुड़ी घटना ने तेजी से ध्यान खींचा।
मतदान कराने वाले कर्मचारियों से उम्मीद की जाती है कि वे चुनावी जिम्मेदारी निभाते समय पूरी तरह तटस्थ रहें। उनके आचरण से मतदाताओं के बीच यह भरोसा बनना चाहिए कि मतदान निष्पक्ष और बिना किसी दबाव के कराया जा रहा है। किसी नेता का पैर छूना भारतीय समाज में व्यक्तिगत सम्मान या शिष्टाचार का हिस्सा माना जा सकता है लेकिन चुनाव ड्यूटी के दौरान यही व्यवहार राजनीतिक पक्षधरता के आरोपों को जन्म दे सकता है।
भाजपा इसी आधार पर कर्मचारी के व्यवहार को अनुचित बता रही है। पार्टी का तर्क है कि कर्मचारी निजी तौर पर किसी नेता का सम्मान कर सकता है लेकिन मतदान केंद्र के भीतर चुनाव ड्यूटी निभाते समय उसे व्यक्तिगत भावनाओं के प्रदर्शन से बचना चाहिए। पार्टी ने सवाल उठाया कि यदि मतदान केंद्र पर तैनात कर्मचारी किसी वरिष्ठ नेता के प्रति सार्वजनिक रूप से ऐसा व्यवहार करता है तो सामान्य मतदाता उस केंद्र की निष्पक्षता के बारे में क्या धारणा बनाएगा।
दूसरी ओर केवल पैर छूने की घटना से मतदान प्रभावित होने या कर्मचारी के किसी राजनीतिक दल से जुड़े होने का निष्कर्ष निकालना भी जल्दबाजी होगी। वायरल वीडियो का पूरा संदर्भ, घटना से पहले और बाद की स्थिति तथा कर्मचारी का बयान सामने आना जरूरी है। निर्वाचन प्रशासन द्वारा जांच किए जाने पर ही यह निर्धारित हो सकेगा कि उसके आचरण से किसी नियम या दिशा-निर्देश का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
वायरल वीडियो ने एक बार फिर चुनाव के दौरान सोशल मीडिया की भूमिका को भी सामने रखा है। मतदान केंद्रों से जुड़े वीडियो कुछ ही समय में व्यापक स्तर पर प्रसारित हो जाते हैं और राजनीतिक दल उन्हें अपने पक्ष के अनुसार प्रस्तुत करने लगते हैं। कई बार अधूरे वीडियो या सीमित दृश्य के आधार पर भी दावे किए जाते हैं। इसलिए किसी भी घटना पर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले आधिकारिक प्रतिक्रिया और वीडियो के पूरे संदर्भ को देखना आवश्यक होता है।
घटना के बाद मतदान केंद्र की सुरक्षा और चुनावी व्यवस्था पर भी लोगों की नजर बनी रही। उपलब्ध जानकारी में मतदान बाधित होने या किसी प्रकार की हिंसा की बात सामने नहीं आई है। विवाद मुख्य रूप से पोलिंग स्टाफ के एक सदस्य के आचरण से संबंधित है। निर्वाचन अधिकारियों की ओर से मामले पर की जाने वाली कार्रवाई आगे की स्थिति तय करेगी।
अशोक गहलोत लंबे समय तक राजस्थान की राजनीति के प्रमुख केंद्र में रहे हैं। जोधपुर उनका गृह क्षेत्र है और यहां उनका व्यापक राजनीतिक प्रभाव माना जाता है। उनके मतदान केंद्र पहुंचने पर समर्थकों और स्थानीय नेताओं की मौजूदगी स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय रहती है। हालांकि चुनाव ड्यूटी पर मौजूद कर्मियों के लिए निर्धारित निष्पक्षता और अनुशासन के मानकों का पालन आवश्यक है।
फिलहाल भाजपा ने घटना को गंभीर बताते हुए निर्वाचन व्यवस्था की विश्वसनीयता का सवाल उठाया है। कांग्रेस की प्रतिक्रिया और निर्वाचन प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही विवाद की पूरी तस्वीर साफ होगी। यह घटना मतदान अधिकारियों के लिए भी संदेश है कि चुनाव ड्यूटी के दौरान उनका प्रत्येक व्यवहार सार्वजनिक जांच के दायरे में आ सकता है। निष्पक्ष चुनाव केवल मतदान की प्रक्रिया से नहीं बल्कि चुनावकर्मियों के तटस्थ और मर्यादित आचरण से भी सुनिश्चित होता है।