जनता से रिश्ता वेबडेस्क। जयपुर, जयपुर-सीकर रूट पर कंडक्टर सुमित्रा ने कहा कि जब एक निजी बस ऑपरेटर उनकी बस के आगे भागा तो मैंने पुलिस और आरटीओ से शिकायत की। उनकी बस रुक गई। सुमित्रा सिर्फ रोडवेज के अधिकार के लिए ही नहीं लड़ती हैं। ऐसा ही 384 महिला कंडक्टर कर रही हैं। रोडवेज को 5 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। महिला कंडक्टर इसे कम करने में आशा की किरण हैं क्योंकि वे पुरुष कंडक्टरों की आय का डेढ़ से दो गुना अधिक लाती हैं। महिलाएं समय पर बसें चलाती हैं, यात्रियों के लिए निजी बस चालकों से करती हैं सौदेबाजी।

उसी रूट के राजस्व का विश्लेषण, महिला कंडक्टरों ने कमाए रु. 1,450 अधिक आय ला रहा है। वे रूट 147 पर काम करते हैं। यानी 2.13 लाख प्रतिदिन या 7.67 करोड़ रुपये प्रति वर्ष अधिक राजस्व रोडवेज को। इस नुकसान का आकलन सभी रूटों पर किया जाए तो रोडवेज की बसें रोजाना करीब 6 हजार रूटों पर 13 लाख किमी चल रही हैं। प्रति रूट एक हजार रुपए से कम होने पर प्रतिदिन करीब 60 लाख का नुकसान होता है। रोडवेज फिलहाल 3 हजार 500 बसों का संचालन करती है। इन बसों में रोजाना करीब 8 लाख यात्री सफर करते हैं और 5 करोड़ से ज्यादा की कमाई करते हैं।
हजारों कंडक्टर लगे हैं। इसमें 475 महिला कंडक्टर शामिल हैं।
आठ साल पहले साल 2011-12 और 2012-13 में पहली बार रोडवेज में महिला कंडक्टरों की भर्ती की गई थी। इन भर्तियों में पहली बार प्रत्येक श्रेणी में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गईं। इसके बाद रोडवेज में अभी तक कोई भर्ती नहीं हुई है।
कहती हैं- रोडवेज भी परिवार, नुकसान बर्दाश्त नहीं
अधिकांश महिला कंडक्टर सीकर, अलवर, टोंक, झुंझुनू जिलों में हैं। जयपुर के डीलक्स डिपो का सबसे ज्यादा योगदान है। हर दिन महिला कंडक्टरों का निजी बसों से सीधा मुकाबला होता है। दो साल में परमिट की शर्तों का उल्लंघन करने पर परिवहन विभाग ने 3040 बसों का चालान किया और 1616 बसों को जब्त कर लिया. उससे 5 करोड़ की कमाई। जिसमें महिला कंडक्टरों की शिकायत पर 532 बसों को जब्त किया गया. 32 निजी बस ऑपरेटरों के खिलाफ भी सरकारी काम में बाधा डालने का मामला दर्ज किया गया है. कंडक्टर विनोद कुमारी कहती हैं- रोडवेज एक परिवार की तरह होता है, इसलिए नुकसान बर्दाश्त नहीं होता।
जिलेवार इस रिपोर्ट में अजमेर, सीकर, झालावाड़ और चित्तौड़गढ़ में 90 फीसदी तक बुवाई की गई है, जबकि करौली ने लक्ष्य के मुकाबले 101 फीसदी बुवाई की है।


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