Jalandhar.जालंधर: जालंधर के सरकारी और निजी स्कूलों के शिक्षकों ने चुनावी कामों के बीच जनगणना के काम पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है। शिक्षकों का कहना है कि चुनाव और जनगणना जैसी सरकारी जिम्मेदारियों का बोझ एक ही समय में उन्हें देना अनुचित है और इससे उनका मूल काम प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय शिक्षक संघ के नेताओं ने कहा कि शिक्षक पहले ही चुनाव में सहयोग देने के लिए मतदान केंद्रों पर तैनात हैं, और अब जनगणना कार्य भी उनसे कराने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में शिक्षा का स्तर और बच्चों की पढ़ाई पर भी असर पड़ सकता है।
शिक्षकों ने बताया कि उन्हें अक्सर बिना पर्याप्त प्रशिक्षण और संसाधन के जनगणना के काम में लगाया जाता है। इस पर शिक्षक संघ ने कहा कि उनका मुख्य कार्य बच्चों को शिक्षित करना है, न कि प्रशासनिक कामों में बाधित होना। उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि चुनाव और जनगणना जैसे कामों को शिक्षकों के अलावा अन्य कर्मचारियों या समर्पित अधिकारियों के माध्यम से कराए जाएं।
टीचरों ने यह भी कहा कि लगातार चुनाव और जनगणना जैसी जिम्मेदारियों के बीच काम करने से उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन उनकी समस्याओं को नहीं समझता और समाधान नहीं करता है, तो शिक्षक आगे आने वाली मुश्किल परिस्थितियों में विरोध स्वरूप हड़ताल या अन्य कदम उठाने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षक समाज की रीढ़ हैं और उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी शिक्षा प्रदान करना है। अगर उन्हें बार-बार प्रशासनिक कामों में लगाया जाएगा, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी और बच्चों का भविष्य जोखिम में पड़ेगा।
जालंधर शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने फिलहाल इस मामले पर टिप्पणी से बचते हुए कहा कि शिक्षक संघ से संवाद कर समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि शिक्षक और जनगणना के कामों के बीच संतुलन बनाए जाने पर विचार किया जाएगा।
स्थानीय अभिभावकों ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने में असमर्थ होंगे यदि उन्हें बार-बार अन्य सरकारी कामों में लगाया जाएगा। अभिभावकों ने प्रशासन से अनुरोध किया कि शिक्षक अपनी मूल जिम्मेदारी में ध्यान केंद्रित कर सकें।