कनाडा भेजे गए श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों को लेकर विवाद पर SGPC ने दी सफाई
Punjab पंजाब: अमृतसर स्थित शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने कनाडा भेजे गए श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूपों को लेकर उठे विवाद और सोशल मीडिया पर चल रहे प्रचार को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। एसजीपीसी ने कहा है कि कुछ लोग जानबूझकर संगत के बीच भ्रम फैलाने और संस्था की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
कमेटी ने संगत से अपील की है कि वह किसी भी प्रकार के भ्रामक प्रचार पर विश्वास न करे और श्री गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़े मामलों में केवल आधिकारिक जानकारी को ही आधार बनाए।
SGPC ने बताया पूरी प्रक्रिया को मर्यादा के अनुसार
एसजीपीसी के सचिव बलविंदर सिंह काहलवां ने कहा कि कनाडा में रहने वाली संगत और वहां की गुरुद्वारा प्रबंधक समितियों की लंबे समय से चली आ रही धार्मिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप भेजे गए हैं।
उन्होंने बताया कि इन स्वरूपों को पूरी श्रद्धा, सम्मान और गुरमत मर्यादा के अनुसार पालकी साहिब में सुशोभित कर रवाना किया गया। पूरी प्रक्रिया के दौरान सिख पंथ की परंपराओं और धार्मिक नियमों का पालन किया गया।
उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब सिख समुदाय के लिए सर्वोच्च धार्मिक ग्रंथ हैं और इसके सम्मान से जुड़ी हर प्रक्रिया को अत्यंत सावधानी और मर्यादा के साथ पूरा किया जाता है।
विवाद को लेकर SGPC ने जताई नाराजगी
एसजीपीसी ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा इस धार्मिक प्रक्रिया को लेकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है। कमेटी के अनुसार, ऐसे प्रयासों का उद्देश्य संगत के बीच गलतफहमी पैदा करना है।
बलविंदर सिंह काहलवां ने कहा कि धार्मिक मामलों में बिना पूरी जानकारी के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। उन्होंने संगत से अपील की कि वह सोशल मीडिया पर फैलने वाली हर जानकारी को सही न माने और तथ्यों की पुष्टि के बाद ही कोई प्रतिक्रिया दे।
कनाडा की संगत की मांग पर भेजे गए स्वरूप
एसजीपीसी के अनुसार, विदेशों में रहने वाली सिख संगत लंबे समय से गुरुद्वारों में धार्मिक गतिविधियों के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूपों की आवश्यकता व्यक्त करती रही है।
इसी मांग और धार्मिक भावना को ध्यान में रखते हुए कनाडा भेजने की प्रक्रिया पूरी की गई। कमेटी ने कहा कि इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई और सभी नियमों का पालन किया गया।
धार्मिक मर्यादा और सम्मान सर्वोपरि
एसजीपीसी ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों की सेवा और सम्मान संस्था की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसके लिए हर कदम धार्मिक मर्यादा और परंपराओं के अनुसार उठाया जाता है।
कमेटी ने यह भी स्पष्ट किया कि विदेशों में भेजे जाने वाले पावन स्वरूपों के लिए भी वही नियम अपनाए जाते हैं, जो धार्मिक परंपरा के तहत निर्धारित हैं।
संगत से शांति बनाए रखने की अपील
एसजीपीसी ने संगत से अपील की है कि वह ऐसे मामलों में संयम बनाए रखे और किसी भी अफवाह या गलत जानकारी के आधार पर प्रतिक्रिया न दे।
कमेटी ने कहा कि संस्था हमेशा सिख परंपराओं, धार्मिक भावनाओं और गुरु साहिब के सम्मान को प्राथमिकता देती है। किसी भी तरह की गलत सूचना से बचने के लिए आधिकारिक माध्यमों से जारी जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।
सोशल मीडिया प्रचार पर उठाए सवाल
आज के दौर में सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने वाली सूचनाओं को लेकर एसजीपीसी ने चिंता जताई है। कमेटी का कहना है कि धार्मिक मुद्दों पर अधूरी या गलत जानकारी समाज में भ्रम की स्थिति पैदा कर सकती है।
उन्होंने संगत से अपील की कि वह सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे संदेशों की सत्यता जांचे और बिना पुष्टि किए किसी भी जानकारी को आगे न बढ़ाए।
SGPC ने दोहराई अपनी प्रतिबद्धता
एसजीपीसी ने कहा कि वह श्री गुरु ग्रंथ साहिब की मर्यादा और सिख सिद्धांतों के अनुसार अपनी जिम्मेदारियां निभाती रहेगी।
कमेटी ने स्पष्ट किया कि कनाडा भेजे गए पावन स्वरूपों की पूरी प्रक्रिया नियमों और धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूरी की गई है। संस्था ने संगत से सहयोग और विश्वास बनाए रखने की अपील की है।