पंजाब: मोहाली जिले के जीरकपुर में निवेश योजना के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि 24 प्रतिशत सालाना रिटर्न देने का झांसा देकर कई राज्यों के लोगों से करीब 5 करोड़ 93 लाख रुपये की ठगी की गई। मामले में मोहाली के एसएसपी को शिकायत मिलने के बाद जीरकपुर थाने में मुख्य आरोपी भरत भूषण के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह मामला बड़े वित्तीय धोखाधड़ी रैकेट से जुड़ा होने के संकेत मिले हैं।
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि भरत भूषण, उसके पिता प्रेम कुमार, भाई संजीव कुमार और अन्य सहयोगियों ने मिलकर एक निवेश योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत लोगों को उनके पैसे को कृषि परियोजनाओं, कीटनाशक उद्योग, ट्रेडिंग और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में लगाने की बात कही गई। निवेशकों को भरोसा दिलाया गया कि उन्हें हर साल 24 प्रतिशत तक का रिटर्न मिलेगा।
शिकायतकर्ताओं में व्यवसायी, सेवानिवृत्त अधिकारी और प्रॉपर्टी कारोबारी शामिल हैं। इनमें जीरकपुर निवासी हर्षील अरोड़ा, चंडीगढ़ के सेवानिवृत्त अधिकारी राजेंद्र कुमार नंदल, कुरुक्षेत्र निवासी संजीव गुप्ता, जीरकपुर के प्रॉपर्टी कारोबारी रमेश कुमार और पानीपत निवासी नीरज कुमार शामिल हैं।
जांच में सामने आया कि हर्षील अरोड़ा ने करीब 83 लाख रुपये, राजेंद्र कुमार नंदल ने लगभग 40 लाख रुपये, संजीव गुप्ता ने 2 करोड़ 75 लाख रुपये, रमेश कुमार ने करीब 1 करोड़ 50 लाख रुपये और नीरज कुमार ने 45 लाख रुपये निवेश किए थे। सभी शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि शुरुआत में उन्हें कुछ रकम ब्याज या रिटर्न के रूप में वापस की गई, जिससे उनका विश्वास बढ़ गया। इसके बाद उनसे बड़ी रकम निवेश कराई गई।
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, जब उन्होंने अपनी मूल निवेश राशि वापस मांगनी शुरू की तो आरोपितों ने बहाने बनाने शुरू कर दिए। धीरे-धीरे भुगतान बंद हो गया और निवेशकों को अपनी रकम वापस मिलने की उम्मीद खत्म होने लगी। इसके बाद पीड़ितों ने पुलिस से शिकायत की।
पुलिस जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं ने बैंक स्टेटमेंट, चेक, आरटीजीएस रिकॉर्ड, भुगतान रसीदें और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, करोड़ों रुपये की राशि अलग-अलग बैंक खातों और संस्थाओं के माध्यम से ट्रांसफर की गई। अब पुलिस इस पूरे धन प्रवाह की जांच कर रही है, ताकि पता लगाया जा सके कि निवेशकों की रकम कहां-कहां इस्तेमाल की गई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपितों ने खुद को रिकोटा एग्रो इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, केसी कंसल्टेंसी और अन्य व्यावसायिक संस्थाओं से जुड़ा बताया था। इन संस्थाओं के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को निवेश के लिए आकर्षित किया गया।
मामले में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है कि शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि मुख्य आरोपी भरत भूषण नवंबर 2025 में अचानक गायब हो गया। आरोपी पक्ष की ओर से दावा किया गया कि भरत भूषण लापता है और सिरसा में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई है। हालांकि, शिकायतकर्ताओं ने इस रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए हैं और इसे जांच का विषय बताया है।
जीरकपुर पुलिस का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों और गवाहों के बयानों के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला धोखाधड़ी और विश्वासघात का बनता है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 406 और 420 के तहत मामला दर्ज किया है।
पुलिस अब आरोपी की तलाश के साथ-साथ पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। निवेशकों को ऊंचे मुनाफे का लालच देकर ठगी करने वाले ऐसे मामलों पर पुलिस विशेष नजर रख रही है।