चंडीगढ़ : पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण को लेकर प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। जिला सैनिक बोर्ड (JZB) की बैठक में सैनिकों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई और उनके समाधान के लिए कई प्रस्तावों को आगे बढ़ाया गया। उपायुक्त एवं जिला सैनिक बोर्ड के अध्यक्ष निशांत कुमार यादव ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि देश की सेवा करने वाले पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने के लिए प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। बैठक में सैनिक परिवारों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने, उनकी आर्थिक सहायता और कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक के दौरान ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले सैनिकों के परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का मुद्दा प्रमुख रूप से उठाया गया। प्रशासन की ओर से ऐसे परिवारों को एक लाख रुपये की सहायता राशि देने की सिफारिश की गई है। अधिकारियों का कहना है कि देश की रक्षा में अपने प्राणों का बलिदान देने वाले जवानों के परिवारों को सम्मान और सहयोग देना समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने कहा कि सैनिकों का योगदान अतुलनीय है। वे कठिन परिस्थितियों में देश की सुरक्षा के लिए अपनी सेवाएं देते हैं। ऐसे में सेवानिवृत्त सैनिकों और शहीद जवानों के परिवारों को किसी भी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन हर संभव कदम उठा रहा है।
बैठक में पूर्व सैनिकों से संबंधित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ पात्र सैनिकों और उनके परिवारों तक समय पर पहुंचे।
प्रशासन ने पूर्व सैनिकों की स्वास्थ्य सुविधाओं, पेंशन संबंधी समस्याओं, दस्तावेजों से जुड़े मामलों और अन्य आवश्यक सेवाओं को लेकर भी चर्चा की। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सैनिकों और उनके आश्रितों की शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा किया जाए।
जिला सैनिक बोर्ड की बैठक में मौजूद अधिकारियों ने कहा कि पूर्व सैनिकों ने अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय देश की सेवा में लगाया है। इसलिए उनके सम्मान, सुविधा और सुरक्षा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। प्रशासन की ओर से समय-समय पर ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ मिल सके।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि सैनिक परिवारों को सरकारी योजनाओं और सहायता कार्यक्रमों की जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे जरूरत के समय इनका लाभ उठा सकें। इसके लिए जागरूकता बढ़ाने और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर जोर दिया गया।
ड्यूटी के दौरान शहीद हुए जवानों के परिवारों के लिए प्रस्तावित एक लाख रुपये की सहायता को प्रशासन की ओर से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह सहायता भले ही आर्थिक रूप से सीमित हो, लेकिन इससे शहीद परिवारों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता का संदेश जाएगा।
पूर्व सैनिक संगठनों ने भी प्रशासन के इस प्रयास का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सैनिकों और उनके परिवारों की समस्याओं को लेकर नियमित रूप से संवाद होना चाहिए, ताकि उनकी जरूरतों को समझकर प्रभावी कदम उठाए जा सकें।
प्रशासन ने आगे भी सैनिकों के कल्याण से जुड़े मुद्दों पर लगातार काम करने की बात कही है। अधिकारियों के अनुसार, जिला सैनिक बोर्ड की बैठकों के माध्यम से पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों की समस्याओं को सीधे सुना जाता है और उनके समाधान के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए जाते हैं।
गौरतलब है कि देशभर में पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें स्वास्थ्य सेवाएं, पेंशन सहायता, पुनर्वास कार्यक्रम और आर्थिक सहयोग जैसी सुविधाएं शामिल हैं। जिला स्तर पर इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी प्रशासन और सैनिक बोर्ड की होती है।
निशांत कुमार यादव ने कहा कि सैनिकों का सम्मान और उनके परिवारों का सहयोग प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सैनिक परिवारों से जुड़े मामलों को संवेदनशीलता के साथ लिया जाए और उन्हें समय पर सहायता उपलब्ध कराई जाए।
प्रशासन के इन फैसलों से जिले के पूर्व सैनिकों और सैनिक परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। अब प्रस्तावित सहायता और अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन पर नजर रहेगी, ताकि जरूरतमंद परिवारों तक इसका लाभ पहुंच सके।