Punjab.पंजाब: पंजाब के एक रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल हाल ही में न्याय की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। उनका आरोप है कि उनके परिवार के साथ अन्याय हुआ है, लेकिन विभिन्न सरकारी और कानूनी संस्थानों में मदद नहीं मिल पा रही। कर्नल ने बताया कि वर्षों की सेवा और देश के लिए किए गए योगदान के बावजूद उन्हें और उनके परिवार को न्याय दिलाने में कई बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल का कहना है कि उनके परिवार के एक सदस्य के साथ अन्याय हुआ, जिसके बाद उन्होंने शिकायतें दर्ज करवाईं, लेकिन मामला अभी तक लंबित है। उन्होंने कहा, “हमने सब जगह दस्तावेज और सबूत पेश किए, लेकिन न्याय मिलने की प्रक्रिया इतनी लंबी और जटिल हो गई कि अब हम थक गए हैं। हमारे लिए हर दिन संघर्ष बन गया है।”
कर्नल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि न्याय की प्रक्रिया में लंबा समय और सरकारी दफ्तरों की पेचीदगियों ने उन्हें मानसिक और भावनात्मक रूप से प्रभावित किया है। उन्होंने अपील की कि राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को उनके मामले पर ध्यान देना चाहिए और जल्द न्याय सुनिश्चित करना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार सरकारी प्रक्रियाओं और कागजी कार्रवाई की जटिलता से आम नागरिक और पूर्व सैनिक दोनों ही प्रभावित होते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि विशेष मामलों में फास्ट ट्रैक या विशेष अदालतों के माध्यम से न्याय प्रक्रिया को तेज किया जा सकता है, ताकि पीड़ितों को समय पर राहत मिल सके।
कर्नल के परिवार के सदस्यों ने भी कहा कि यह स्थिति उनके लिए बेहद कठिन है। उन्होंने बताया कि न्याय के लिए संघर्ष करना न केवल मानसिक रूप से थकाने वाला है, बल्कि आर्थिक और सामाजिक रूप से भी भारी बोझ बन गया है। उन्होंने अपील की कि सरकार और प्रशासन उनके मामले को प्राथमिकता दें और उन्हें न्याय दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए।
पंजाब के सामाजिक कार्यकर्ताओं और पूर्व सैनिक संगठनों ने इस मामले में समर्थन व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि रिटायर्ड सैनिकों के साथ और उनके परिवार के मामलों में प्रशासन को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। उनका कहना है कि जो लोग देश की सेवा में योगदान देते हैं, उन्हें नागरिक जीवन में उचित सम्मान और न्याय मिलने की आवश्यकता है।
कर्नल ने यह भी बताया कि उन्होंने उच्च अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन के साथ कई बार मुलाकात की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि अब वे जनता और मीडिया के माध्यम से अपनी आवाज़ उठाना चाहते हैं ताकि न्याय के लिए उनकी लड़ाई को व्यापक समर्थन मिले।
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