Punjab 5% से ज्यादा फीस बढ़ोतरी पर रोक की तैयारी

Update: 2026-08-02 04:58 GMT

Punjab पंजाब में बिना सरकारी मदद वाले शिक्षण संस्थानों की फीस को रेगुलेट करने वाला बिल (संशोधन बिल, 2026) पंजाब विधानसभा के मॉनसून सत्र में पेश किया जाएगा, जो 3 अगस्त से शुरू हो रहा है। AAP सरकार का दावा है कि यह बिल 13 जुलाई से लागू अध्यादेश को स्थायी कानूनी आधार देगा। इससे प्राइवेट स्कूलों की फीस पर सख्त नियंत्रण सुनिश्चित होगा और छात्र व अभिभावक मनमानी और अत्यधिक फीस बढ़ोतरी से बच सकेंगे। पंजाब भर के 7,800 से ज़्यादा प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले 32 लाख से ज़्यादा छात्रों को इसका फ़ायदा होगा। इसे देश के सबसे सख्त फीस रेगुलेशन सिस्टम में से एक माना जा रहा है।

सरकार ने सालाना फीस बढ़ोतरी पर सख्त सीमा तय की है, ज़्यादा वसूली गई रकम को वापस करना अनिवार्य कर दिया है और अधिकारियों को स्कूलों के खातों का फॉरेंसिक ऑडिट करने का अधिकार दिया है। प्राइवेट स्कूल अब अपनी मर्ज़ी से सालाना पांच प्रतिशत से ज़्यादा फीस नहीं बढ़ा सकते। इससे ज़्यादा बढ़ोतरी के लिए ज़िला रेगुलेटरी बॉडी की लिखित मंज़ूरी ज़रूरी होगी, जो स्कूल के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के बाद ही दी जाएगी।

शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा, "अगर किसी स्कूल की पिछले तीन सालों की कुल फीस बढ़ोतरी 15% से ज़्यादा होती है, तो अतिरिक्त रकम छात्रों और अभिभावकों को वापस करनी होगी। फीस की सीमा तय करते समय सभी अनिवार्य शुल्क एक साथ जोड़े जाते हैं, इसलिए स्कूल अलग-अलग मदों में फीस बांटकर सीमा से बच नहीं सकते।" इसे सख्ती से लागू करने के लिए हर ज़िले में डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता में एक रेगुलेटरी बॉडी बनाई गई है। उन्होंने कहा, "हर प्राइवेट स्कूल के लिए ज़रूरी है कि वह तय समय-सीमा के भीतर शिक्षा विभाग के पोर्टल पर पिछले चार सालों का फीस रिकॉर्ड अपलोड करे।"इस कानून में सख्त सज़ा का प्रावधान है। पहली बार उल्लंघन करने पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगेगा, जबकि दूसरी बार उल्लंघन करने पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगेगा। बार-बार उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई के अलावा स्कूल की मान्यता भी रद्द की जा सकती है।

Tags:    

Similar News