Punjab महंगाई भत्ते (DA) के बकाये का भुगतान न करने को लेकर न्यायिक जांच और कर्मचारियों के विरोध का सामना करने के बाद, पंजाब सरकार ने लंबित बकाये के भुगतान से पड़ने वाले वित्तीय बोझ का आकलन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वित्त विभाग ने गुरुवार को सभी विभागों के प्रमुखों - जिनमें विशेष मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव, वित्तीय आयुक्त, प्रधान सचिव और प्रशासनिक सचिव शामिल हैं - को एक पत्र भेजा है। इसमें पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देशों को लागू करने से पड़ने वाले वित्तीय बोझ का विवरण मांगा गया है।
विभाग ने 17 अगस्त, 2026 को जारी उन निर्देशों पर भी स्पष्टीकरण मांगा है, जो एक सिविल रिट याचिका और उससे जुड़े मामलों (जिसमें बाद की 'लेटर्स पेटेंट अपील' और बोर्ड व निगमों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं) में आए फैसले को लागू करने से संबंधित हैं। कर्मचारियों ने इस पत्र का "गलत अर्थ" निकाला और इसे महंगाई भत्ते के बकाये के भुगतान को रोकने की कोशिश के रूप में देखा। वित्त विभाग के एक अधिकारी ने कहा, "आज शुरू की गई इस कवायद का उद्देश्य कुल वित्तीय बोझ का आकलन करना और उसके अनुसार बजट में उचित प्रावधान करना है।"
लंबित DA और महंगाई राहत (DR) के बकाये के रूप में कुल देनदारी लगभग 14,191 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें राज्य सरकार के कर्मचारी और पेंशनभोगी दोनों शामिल हैं। सरकार ने पहले भी यह तर्क दिया है कि एक ही बार में पूरी राशि का भुगतान करने से वित्तीय स्थिति पर भारी असर पड़ेगा, इसलिए उसने अगले पांच वित्तीय वर्षों में चरणों में बकाया राशि का भुगतान करने का प्रस्ताव दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा ने DA बकाये के मामले में दायर एक हलफनामे को लेकर शुरू हुई 'आपराधिक अवमानना' (criminal contempt) की कार्यवाही में उच्च न्यायालय से बिना शर्त माफी मांगी है। अदालत ने 6 अक्टूबर को सिन्हा को अवमानना का नोटिस जारी किया था। अदालत ने कहा था कि सर्वोच्च न्यायालय में राज्य की 'विशेष अनुमति याचिका' (SLP) की स्थिति के बारे में उनका बयान "पूरी तरह से गलत" था और ऐसा लगता है कि यह अदालत को गुमराह करने के इरादे से दिया गया था।
अदालत ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाये के भुगतान के संबंध में न्यायिक निर्देशों का पालन करने को लेकर राज्य सरकार के "अड़ियल रवैये" पर कड़ी फटकार लगाई है। साथ ही, अदालत ने मुख्य सचिव को अगली सुनवाई की तारीख, यानी 3 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। मुख्य सचिव को 1 लाख रुपये का खर्च चुकाने की शर्त पर, 30 अक्टूबर तक एक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया गया है।