Punjab.पंजाब: देश के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक हस्तशिल्प से जुड़ी फटकने वाली टोकरियों की मांग में लगातार गिरावट देखी जा रही है। एक समय था जब ये टोकरियाँ हर घर की जरूरत हुआ करती थीं, लेकिन अब आधुनिकता और प्लास्टिक उत्पादों के बढ़ते चलन ने इनकी जगह ले ली है। इसका सीधा असर उन कारीगरों पर पड़ रहा है, जिनकी आजीविका पूरी तरह इसी कला पर निर्भर है। ग्रामीण क्षेत्रों में बांस और सरकंडे से बनाई जाने वाली ये टोकरियाँ न केवल उपयोगी होती थीं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी थीं। इनका उपयोग अनाज साफ करने, फल-सब्जियां रखने और घरेलू कामों में बड़े पैमाने पर किया जाता था। लेकिन अब बाजार में सस्ते और टिकाऊ प्लास्टिक उत्पादों की भरमार ने इनकी मांग को काफी हद तक कम कर दिया है।
कारीगरों का कहना है कि पहले जहां उन्हें पूरे साल काम मिलता था, वहीं अब काम के अवसर सीमित हो गए हैं। कई परिवारों ने इस पारंपरिक पेशे को छोड़कर दूसरे कामों की तलाश शुरू कर दी है। कुछ कारीगर मजदूरी करने को मजबूर हैं, तो कुछ शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। एक स्थानीय कारीगर ने बताया कि टोकरियाँ बनाने में काफी मेहनत और समय लगता है, लेकिन बाजार में उनकी उचित कीमत नहीं मिल पाती। दूसरी ओर, प्लास्टिक की बनी चीजें सस्ती होने के कारण लोग उन्हें अधिक पसंद कर रहे हैं। इससे पारंपरिक कला धीरे-धीरे खत्म होने की कगार पर पहुंच रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में यह कला पूरी तरह विलुप्त हो सकती है। सरकार द्वारा हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन इनका लाभ हर कारीगर तक नहीं पहुंच पा रहा है।
इसके अलावा, बाजार में इन उत्पादों के लिए उचित प्लेटफॉर्म की कमी भी एक बड़ी समस्या है। अगर इन टोकरियों को ऑनलाइन और शहरी बाजारों में बेहतर तरीके से पेश किया जाए, तो उनकी मांग फिर से बढ़ सकती है। पारंपरिक टोकरियाँ न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित विकल्प हैं। ऐसे में जरूरी है कि लोगों को इनके महत्व के प्रति जागरूक किया जाए और कारीगरों को आर्थिक व तकनीकी सहायता प्रदान की जाए। कुल मिलाकर, पारंपरिक टोकरियों की घटती मांग एक गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। यदि इस दिशा में जल्द ही प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह अनमोल कला इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएगी।
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