Punjab पंजाब त्योहारी सीज़न से पहले कुछ डीलरों द्वारा तय सीमा (4,000 क्विंटल) से ज़्यादा स्टॉक जमा करने की शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने चीनी व्यापारियों के यहां जांच तेज़ कर दी है। इससे कृत्रिम कमी और कीमतों में और बढ़ोतरी की चिंता बढ़ गई है। खाद्य आपूर्ति विभाग व्यापारियों के पास मौजूद स्टॉक की असल मात्रा की जांच 'फूड स्टॉक मॉनिटरिंग पोर्टल' पर बताई गई मात्रा से कर रहा है। यह कदम राज्य सरकार के 17 अगस्त के उस आदेश के बाद उठाया गया है जिसमें चीनी डीलरों के लिए पोर्टल पर रजिस्टर करना, अपना मौजूदा स्टॉक अपलोड करना और हर शुक्रवार को जानकारी अपडेट करना ज़रूरी किया गया था।
केंद्र सरकार ने किसी भी समय या जगह पर चीनी का स्टॉक 4,000 क्विंटल (यानी 400 टन) तक सीमित कर दिया है। डीलरों को चीनी मिलने की तारीख से 30 दिनों से ज़्यादा समय तक उसे अपने पास रखने की भी मनाही है। ये पाबंदियां 30 नवंबर तक लागू रहेंगी और इनका मकसद जमाखोरी और कालाबाज़ारी को रोकना है। यह जांच ऐसे समय में शुरू हुई है जब पूरे पंजाब में चीनी की कीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं। थोक बाज़ार में खुली चीनी अभी लगभग 61-68 रुपये प्रति किलो बिक रही है, जबकि एक हफ़्ते पहले यह लगभग 45 रुपये प्रति किलो थी। इसी दौरान खुदरा कीमतें भी लगभग 50 रुपये से बढ़कर 65-70 रुपये प्रति किलो हो गई हैं। व्यापारियों ने बाज़ार में अनियमित सप्लाई का हवाला देते हुए ब्रांडेड चीनी की कमी की भी बात कही है।
अधिकारियों ने कहा कि शिकायतों से यह चिंता पैदा हुई है कि व्यापारी तय सीमा से ज़्यादा स्टॉक जमा करके रखे हुए हैं और उसे बाज़ार में नहीं ला रहे हैं। इसलिए ज़िला अधिकारियों को नियमित रूप से भौतिक जांच करने और ऑनलाइन जमा किए गए स्टॉक के ब्योरे की पुष्टि करने का निर्देश दिया गया है। जो डीलर पोर्टल पर रजिस्टर नहीं करते हैं या गलत, अधूरी या देर से जानकारी देते हैं, उनके खिलाफ 'आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955' के तहत कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, व्यापारियों का कहना है कि 4,000 क्विंटल की सीमा का ज़्यादातर असली थोक विक्रेताओं पर असर पड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि उनका स्टॉक आम तौर पर तय सीमा से कम ही रहता है।
जालंधर में थोक चीनी व्यापारी संघ के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कीमतों में भारी बढ़ोतरी का कारण गन्ने की सीमित उपलब्धता के बीच चीनी मिलों से अपर्याप्त सप्लाई को बताया। उन्होंने कहा कि त्योहारी सीज़न से पहले चीनी की कीमतें आम तौर पर 200-500 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ती हैं, लेकिन इस साल यह बढ़ोतरी पहले ही 700-800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। जालंधर के ज़िला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक, हरशरण सिंह बराड़ ने कहा कि विभाग को चंडीगढ़ स्थित मुख्यालय से स्टॉक से जुड़ी पाबंदियों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश मिले हैं। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने की उम्मीद को देखते हुए व्यापारियों का कहना है कि अक्टूबर के बाद चीनी उत्पादन का नया सीज़न शुरू होने और नई सप्लाई आने तक कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।