Punjab.पंजाब: पंजाब के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रताप सिंह बाजवा ने राज्य के मुख्यमंत्री से संजीव अरोड़ा को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की है। बाजवा का आरोप है कि अरोड़ा की हालिया गतिविधियाँ और बयान राज्य की राजनीतिक स्थिरता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली के लिए गंभीर खतरा हैं।
बाजवा ने अपने बयान में कहा, “संजीव अरोड़ा ने ऐसी कार्रवाइयाँ की हैं, जो सार्वजनिक विश्वास और प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ हैं। मैं मुख्यमंत्री से अपील करता हूँ कि वे ऐसे व्यक्तित्व को सरकारी पद पर बनाए रखने की बजाय तुरंत बर्खास्त करें। इससे राज्य सरकार की विश्वसनीयता और प्रशासनिक अनुशासन मजबूत होगा।”
प्रताप सिंह बाजवा ने यह भी आरोप लगाया कि अरोड़ा ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा और व्यक्तिगत स्वार्थ को प्रशासनिक जिम्मेदारियों से ऊपर रखा। उन्होंने कहा कि “जब ऐसे अधिकारी या नेता जिम्मेदारी और नैतिकता के स्तर पर खरे नहीं उतरते, तो उनकी मौजूदगी सरकार के कामकाज को प्रभावित कर सकती है। ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई आवश्यक है।”
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बाजवा का यह बयान आगामी चुनावों के परिप्रेक्ष्य में भी महत्वपूर्ण है। यह कदम विपक्ष और जनता के बीच सरकार की जवाबदेही और प्रशासनिक साख पर सवाल उठाने का अवसर प्रदान कर सकता है। कई विशेषज्ञ इसे राज्य की राजनीतिक गलियारे में नए बहस का केंद्र मान रहे हैं।
हालांकि, अरोड़ा और उनके समर्थकों ने इस मांग का विरोध किया है। उनका कहना है कि अरोड़ा ने कोई भी गैरकानूनी या अनुचित कार्य नहीं किया है और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। अरोड़ा के करीबी सहयोगियों ने कहा कि “प्रताप सिंह बाजवा का बयान केवल राजनीतिक बयानबाजी है और इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को बदनाम करना है।”
स्थानीय मीडिया में यह मामला लगातार चर्चा में है। जनता और राजनीतिक कार्यकर्ता इस विवाद को राज्य की राजनीति में बढ़ते तनाव का संकेत मान रहे हैं। कई लोग इसे प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक नैतिकता के बीच संतुलन का मुद्दा बता रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवाद न केवल राजनीतिक दलों के बीच तनाव बढ़ाते हैं, बल्कि आम जनता के बीच भी भ्रम और चिंता का कारण बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करनी चाहिए।
बाजवा ने चेतावनी दी कि यदि मुख्यमंत्री ने संजीव अरोड़ा पर कार्रवाई नहीं की, तो कांग्रेस और विपक्षी दल इस मुद्दे को हर राजनीतिक और कानूनी मंच पर उठाएंगे। उनका कहना था, “हम जनता और न्यायिक प्रणाली के साथ खड़े हैं और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”