चंडीगढ़। पंजाब में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। राज्य के कैबिनेट मंत्री और आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता हरपाल सिंह चीमा ने भारतीय चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इशारे पर SIR प्रक्रिया का इस्तेमाल विपक्षी दलों के समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए किया जा रहा है। चीमा ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए खतरा बताते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों से इनकार किया है।
पंजाब विधानसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव पारित
पंजाब विधानसभा ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान कथित अनियमितताओं और योग्य मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है।विधानसभा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू कराने का आग्रह किया है। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि इस प्रक्रिया के कारण गरीब और विपक्ष समर्थक मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित हुए हैं।हालांकि, विधानसभा का प्रस्ताव अपने आप में किसी आपराधिक आरोप के साबित होने या कानूनी कार्रवाई शुरू होने का प्रमाण नहीं है।
हरपाल सिंह चीमा ने भाजपा पर साधा निशाना
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में हरपाल सिंह चीमा ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनावी लाभ हासिल करने के उद्देश्य से मतदाता सूची के पुनरीक्षण का दुरुपयोग कर रही है।उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दलों के समर्थकों के नाम योजनाबद्ध तरीके से मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। चीमा के अनुसार, ऐसी गतिविधियां लोकतंत्र की निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती हैं।उन्होंने कहा कि पंजाब विधानसभा ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रपति से कार्रवाई करने का औपचारिक अनुरोध किया है।
SIR प्रक्रिया को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसके अंतर्गत मतदाता सूची में दर्ज नामों और पात्रता संबंधी विवरणों का सत्यापन किया जाता है।इस प्रक्रिया का घोषित उद्देश्य पात्र मतदाताओं का सही रिकॉर्ड सुनिश्चित करना और अपात्र अथवा गलत प्रविष्टियों को हटाना है।हालांकि, विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि पुनरीक्षण के दौरान कुछ योग्य मतदाताओं के नाम भी हटाए गए हैं। विशेष रूप से गरीब और कमजोर वर्गों के मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि उसका उद्देश्य मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना है। आयोग राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज कर चुका है और गलत तरीके से हटाए गए पात्र मतदाताओं के दोबारा पंजीकरण की व्यवस्था होने की बात कहता है।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर राजनीतिक विवाद
इस मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी लगातार चुनाव आयोग और केंद्र सरकार की आलोचना कर रही है।इससे पहले भी पार्टी के नेताओं ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन किए थे। अक्टूबर में चंडीगढ़ में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान मनीष सिसोदिया और हरपाल सिंह चीमा सहित कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था।उस दौरान आम आदमी पार्टी के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी उठाई थी।
भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को किया खारिज
भाजपा ने मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष की आलोचना का विरोध किया है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर उन्हें कमजोर करने का प्रयास कर रहा है।भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने इससे पहले चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर विपक्ष के आरोपों को संस्थाओं के खिलाफ अभियान बताया था।इस तरह SIR को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार जारी हैं।
आगे क्या हो सकता है?
पंजाब विधानसभा द्वारा प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद अब इस मामले में राष्ट्रपति और संबंधित संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के अधीन होती है। केवल राज्य विधानसभा के प्रस्ताव के आधार पर उन्हें पद से नहीं हटाया जा सकता।फिलहाल पंजाब सरकार ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। वहीं, यह विवाद मतदाता अधिकारों, चुनाव आयोग की स्वायत्तता और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
Tags: