Jalandhar: शिक्षकों का संगठित प्रदर्शन, संगरूर रैली में उठेगी मांगों की आवाज
Jalandhar.जालंधर: राज्य में शिक्षा नीति और लंबित मांगों को लेकर शिक्षकों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। इसी कड़ी में विभिन्न शिक्षक संगठनों से जुड़े सैकड़ों शिक्षक संगरूर में आयोजित रैली में शामिल होने के लिए रवाना हुए। शिक्षकों ने सरकार पर चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा न करने का आरोप लगाते हुए जमकर आलोचना की।
शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगें अनसुनी की जा रही हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था और उनके कार्य वातावरण पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। रैली में शामिल होने से पहले शिक्षकों ने कहा कि सरकार ने नियमितीकरण, वेतन विसंगतियों को दूर करने और सेवा शर्तों में सुधार जैसे कई वादे किए थे, लेकिन अब तक उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे वर्षों से अस्थायी या अनुबंध आधारित व्यवस्था में काम कर रहे हैं, जबकि समान कार्य के बावजूद उन्हें समान वेतन और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। इससे शिक्षकों में भारी असंतोष है। उनका कहना है कि बार-बार ज्ञापन देने और बातचीत के बावजूद सरकार ने केवल आश्वासन ही दिए हैं, जमीनी स्तर पर कोई समाधान नहीं हुआ।
रैली में शामिल शिक्षकों ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग में खाली पदों को भरने की प्रक्रिया भी धीमी है, जिससे स्कूलों में पढ़ाई का स्तर प्रभावित हो रहा है। कई स्कूलों में एक ही शिक्षक को कई कक्षाएं संभालनी पड़ रही हैं, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना कठिन हो गया है।
शिक्षकों ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा समय-समय पर घोषित की गई नीतियों और सुधारों को लागू करने में देरी की जा रही है। इस कारण शिक्षक वर्ग में निराशा बढ़ रही है और वे अब बड़े आंदोलन की राह पर मजबूर हो रहे हैं।
संगरूर रैली को लेकर शिक्षकों में खासा उत्साह देखा गया। विभिन्न जिलों से शिक्षक बसों और निजी वाहनों के माध्यम से रवाना हुए। रवाना होने से पहले कई स्थानों पर सभा आयोजित की गई, जिसमें सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
शिक्षक नेताओं ने कहा कि यह रैली केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि सरकार को उसकी जिम्मेदारियों की याद दिलाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शिक्षकों की समस्याओं का समाधान जरूरी है।
अंत में शिक्षकों ने सरकार से अपील की कि वह जल्द से जल्द उनकी लंबित मांगों पर गंभीरता से विचार करे और ठोस नीति बनाकर लागू करे, ताकि शिक्षा व्यवस्था को सुधार की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।