अमृतसर। पंजाब में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रदर्शन का सिलसिला लगातार जारी है। अब साझा मुलाजिम मंच और मुलाजिम व पेंशनर्स साझा फ्रंट के आह्वान पर प्रदेश के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने जिला प्रबंधकीय कॉम्प्लेक्स के सामने धरना देकर पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

कर्मचारी संगठनों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार उनकी मांगों को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रही है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि लंबे समय से कई मांगें लंबित हैं, लेकिन सरकार की ओर से समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

धरने के दौरान कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े मुद्दों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे उनमें नाराजगी बढ़ती जा रही है।

कर्मचारी संगठनों के इस आंदोलन को भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) ने भी समर्थन देने की घोषणा की है। किसान संगठन के समर्थन के बाद आंदोलन को और मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।

संगठनों ने अब 12 सितंबर को अमृतसर में बड़ा प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। जानकारी के अनुसार, इस दौरान कर्मचारी पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ के आवास का घेराव करने की तैयारी में हैं।

साझा मुलाजिम मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार को कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। उनका कहना है कि केवल आश्वासन देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि मांगों को लागू करने के लिए ठोस निर्णय लेने होंगे।

मंच के कन्वीनर सुखप्रीत सिंह पन्नू, महासचिव अंग्रेज सिंह और वित्त सचिव जसपाल सिंह ने कहा कि पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार कर्मचारियों की मांगों को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार ध्यान आकर्षित कराने के बावजूद सरकार की ओर से उचित प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है।

इसके अलावा रजवंत बागड़ियां, अजीत सिंह फतेह और बलदेव सिंह कल्ला सहित अन्य नेताओं ने भी धरने को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कर्मचारी वर्ग अपनी जायज मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहा है।

कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सरकारी विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों की कई समस्याएं हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए सरकार को प्राथमिकता के आधार पर कदम उठाने चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में प्रदेश स्तर पर बड़े आंदोलन की रणनीति बनाई जा सकती है।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि उनका उद्देश्य सरकार को परेशान करना नहीं, बल्कि अपनी समस्याओं का समाधान करवाना है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को अनदेखा करने से सरकारी कामकाज भी प्रभावित हो सकता है।

वहीं, भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के समर्थन से आंदोलन को व्यापक समर्थन मिलने की उम्मीद है। किसान संगठन पहले भी विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन कर चुके हैं।

12 सितंबर को होने वाले प्रदर्शन को लेकर कर्मचारी संगठनों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। संगठन कार्यकर्ताओं और कर्मचारियों से बड़ी संख्या में अमृतसर पहुंचने की अपील कर रहे हैं।

प्रशासन की नजर भी अब इस आंदोलन पर बनी हुई है। बड़े प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी तैयारियां की जा सकती हैं।

फिलहाल कर्मचारी संगठनों और पंजाब सरकार के बीच मांगों को लेकर गतिरोध जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार कर्मचारियों के साथ बातचीत कर समाधान निकालती है या आंदोलन और आगे बढ़ता है।

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