ड्रग्स और हथियारों की सप्लाई का भंडाफोड़ दो तस्कर गिरफ्तार 517 ग्राम हेरोइन बरामद
चंडीगढ़। ट्राईसिटी में सक्रिय नशा तस्करों और अवैध हथियार सप्लायरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए चंडीगढ़ पुलिस के ऑपरेशन सेल ने दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों के कब्जे से 517 ग्राम हेरोइन, दो देसी पिस्तौल, चार कारतूस, एक इलेक्ट्रॉनिक कांटा, छोटी प्लास्टिक की पुड़ियां और 20 हजार रुपये की ड्रग मनी बरामद की गई है। इतनी मात्रा में हेरोइन और हथियारों की एक साथ बरामदगी से आशंका जताई जा रही है कि आरोपित नशीले पदार्थों की बिक्री के साथ आपराधिक तत्वों को हथियार भी उपलब्ध कराते थे।
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान मलोया की ईडब्ल्यूएस कॉलोनी में रहने वाले 23 वर्षीय मोनू और धनास के स्मॉल फ्लैट्स निवासी सचिन शुक्ला के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, दोनों चंडीगढ़ और मोहाली के अलग-अलग इलाकों में नशे तथा अवैध हथियारों की सप्लाई से जुड़े हुए थे। आरोपितों के संपर्क में रहने वाले लोगों और उन्हें नशीले पदार्थ तथा हथियार उपलब्ध कराने वाले स्रोतों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
ऑपरेशन सेल को आरोपितों की गतिविधियों के संबंध में सूचना मिली थी। इसके आधार पर पुलिस टीम ने निगरानी बढ़ाई और संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखी। पुख्ता सूचना मिलने के बाद दोनों आरोपितों को पकड़ लिया गया। तलाशी के दौरान उनके पास से हेरोइन के अलावा दो देसी पिस्तौल और चार कारतूस मिलने पर मामले की गंभीरता बढ़ गई।
आरोपितों से बरामद इलेक्ट्रॉनिक कांटा और छोटी प्लास्टिक की पुड़ियां इस बात की ओर संकेत करती हैं कि हेरोइन को छोटी मात्रा में तौलकर अलग-अलग पैकेट में तैयार किया जाता था। ऐसी पुड़ियों को स्थानीय स्तर पर ग्राहकों और छोटे तस्करों तक पहुंचाए जाने की आशंका है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इसके जरिए अब तक कितनी मात्रा में नशीला पदार्थ बेचा जा चुका है।
बरामद 20 हजार रुपये को पुलिस ने ड्रग मनी बताया है। संदेह है कि यह राशि नशीले पदार्थों की बिक्री से प्राप्त हुई थी। इसकी पुष्टि के लिए आरोपितों के आर्थिक लेन-देन की जानकारी खंगाली जा सकती है। उनके बैंक खातों, डिजिटल भुगतान, मोबाइल फोन और संपर्कों की जांच से नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने में मदद मिलने की संभावना है।
हेरोइन के साथ हथियार मिलने से पुलिस इस संभावना की भी पड़ताल कर रही है कि आरोपित केवल ड्रग सप्लाई तक सीमित थे या उनका संबंध किसी संगठित आपराधिक गिरोह से भी था। दोनों देसी पिस्तौल कहां से खरीदी गईं, किस व्यक्ति ने इन्हें उपलब्ध कराया और इन्हें किन लोगों तक पहुंचाया जाना था, यह जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। कारतूसों के स्रोत की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
ट्राईसिटी में चंडीगढ़ के साथ मोहाली और पंचकूला के शहरी तथा सीमावर्ती इलाके शामिल हैं। अलग-अलग प्रशासनिक सीमाओं के कारण तस्कर एक क्षेत्र में नशीला पदार्थ रखने और दूसरे क्षेत्र में उसकी सप्लाई करने जैसी रणनीति अपना सकते हैं। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपित चंडीगढ़ और मोहाली में सक्रिय थे। ऐसे में संबंधित क्षेत्रों की एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
मलोया और धनास जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बड़ी संख्या में छोटे मकान और फ्लैट हैं। भीड़भाड़ का फायदा उठाकर अपराधी अपनी गतिविधियों को छिपाने का प्रयास कर सकते हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपितों ने नशीला पदार्थ और हथियार कहां छिपाकर रखे थे तथा क्या उनके पास कोई अन्य ठिकाना भी था। दोनों के परिचितों और नियमित संपर्क में रहने वाले संदिग्ध लोगों का सत्यापन किया जा सकता है।
पुलिस आरोपितों के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल, मैसेज और डिजिटल गतिविधियों से उनके संपर्कों का पता लगाने का प्रयास करेगी। इससे यह जानकारी मिल सकती है कि नशे की खेप कहां से आई थी और उसकी आपूर्ति किन इलाकों में की जानी थी। यदि मोबाइल में खरीदारों या सप्लायरों से संबंधित रिकॉर्ड मिलता है तो नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान हो सकती है।
बरामद हेरोइन की गुणवत्ता और शुद्धता का पता लगाने के लिए नमूने की फोरेंसिक जांच कराई जा सकती है। इसके साथ पिस्तौलों का बैलिस्टिक परीक्षण यह स्पष्ट करने में सहायक होगा कि इन हथियारों का इस्तेमाल पहले किसी आपराधिक वारदात में किया गया था या नहीं। हथियारों पर मौजूद निशान और उनकी बनावट से उनके निर्माण तथा आपूर्ति स्रोत के बारे में भी संकेत मिल सकते हैं।
नशीले पदार्थों के कारोबार में अक्सर मुख्य सप्लायर स्थानीय युवाओं या आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को छोटी मात्रा में ड्रग्स बेचने के लिए इस्तेमाल करते हैं। उन्हें कमीशन या नशे की खुराक देकर नेटवर्क से जोड़ा जाता है। इस कारण केवल आखिरी स्तर के विक्रेताओं की गिरफ्तारी से पूरा नेटवर्क समाप्त नहीं होता। पुलिस के सामने अब हेरोइन पहुंचाने वाले बड़े सप्लायर और हथियार उपलब्ध कराने वाली श्रृंखला तक पहुंचने की चुनौती है।
आरोपितों से पूछताछ के दौरान यह भी पता लगाया जाएगा कि उनके ग्राहक कौन थे और क्या वे शिक्षण संस्थानों, सार्वजनिक स्थानों या आवासीय क्षेत्रों में नशीले पदार्थ पहुंचाते थे। पुलिस उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी भी जुटा रही है। यदि पहले से कोई मामला दर्ज मिला तो मौजूदा नेटवर्क के विस्तार को समझने में सहायता मिल सकती है।
नशीले पदार्थ और अवैध हथियारों का गठजोड़ कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा माना जाता है। नशे के कारोबार में पैसों के लेन-देन और इलाके पर नियंत्रण को लेकर हिंसक टकराव की आशंका रहती है। अवैध पिस्तौलों की उपलब्धता लूट, धमकी, वसूली और आपसी रंजिश की घटनाओं को बढ़ा सकती है। इसीलिए इस बरामदगी को ऑपरेशन सेल की महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।
पुलिस अब इस मामले की आगे की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। दोनों आरोपितों से मिली जानकारी के आधार पर संभावित ठिकानों पर दबिश और अन्य संदिग्धों की तलाश की जा सकती है। इस कार्रवाई से फिलहाल स्थानीय स्तर पर सक्रिय सप्लाई चेन को झटका लगा है, लेकिन नेटवर्क के मुख्य स्रोत और अन्य सहयोगियों की पहचान के बाद ही इसकी पूरी तस्वीर सामने आएगी।