धामी बोले, गुरु ग्रंथ साहिब के डिजिटल स्वरूपों पर UID नहीं होगा

Update: 2026-05-10 07:00 GMT
Punjab.पंजाब: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज स्पष्ट किया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब के डिजिटल स्वरूपों या ऑनलाइन उपलब्ध संसाधनों पर किसी भी प्रकार का UID (यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर) नहीं दिखाया जाएगा। उन्होंने यह निर्णय धर्म और सांस्कृतिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए लिया गया।
धामी ने कहा कि एसजीपीसी (श्री गुरु ग्रंथ साहिब समिति) और राज्य सरकार ने मिलकर यह फैसला किया है ताकि धार्मिक ग्रंथों की गरिमा और श्रद्धा को बनाए रखा जा सके। उन्होंने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ग्रंथों को सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से प्रस्तुत करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “गुरु ग्रंथ साहिब हमारे लिए केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है। इसे किसी भी तकनीकी या प्रशासनिक प्रणाली में सीमित करना या अनुचित पहचान अंकित करना गलत होगा। इसलिए एसजीपीसी ने UID को हटाने का निर्णय लिया है।”
राज्य सरकार और एसजीपीसी की बैठक में यह भी तय किया गया कि डिजिटल संसाधनों की सुरक्षा के लिए अन्य उपाय किए जाएंगे, ताकि ऑनलाइन उपलब्ध स्वरूपों का दुरुपयोग न हो। धामी ने बताया कि तकनीकी टीम द्वारा आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन यह पूरी प्रक्रिया धार्मिक और सांस्कृतिक मानदंडों का पालन करते हुए की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम धार्मिक संवेदनशीलता और डिजिटल सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। डिजिटल ग्रंथों की पहचान और प्रमाणिकता सुनिश्चित करना जरूरी है, लेकिन इसके लिए ऐसी तकनीक अपनाई जानी चाहिए जो श्रद्धा और सम्मान का उल्लंघन न करे।
एसजीपीसी के वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि UID को हटाने का निर्णय धार्मिक समुदाय और तकनीकी विशेषज्ञों की सलाह के बाद लिया गया। उन्होंने कहा कि इससे गुरु ग्रंथ साहिब की डिजिटल प्रतियों की प्रामाणिकता प्रभावित नहीं होगी, बल्कि उनकी गरिमा बनी रहेगी।
धामी ने राज्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर धार्मिक ग्रंथों की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी रूप में धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने वाली तकनीकी कार्रवाई नहीं होने देगी।
इस फैसले के बाद धार्मिक संगठनों और नागरिकों ने मुख्यमंत्री के निर्णय का स्वागत किया है। वे इसे धार्मिक सम्मान और डिजिटल सुरक्षा का सही संतुलन मान रहे हैं।
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