Punjab सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट की पूर्व जज जयश्री ठाकुर को पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल का सदस्य बनाने (को-ऑप्शन) के खिलाफ़ उठाई गई आपत्ति को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वह बेहतरीन जजों में से एक हैं और उनके नॉमिनेशन का अच्छा स्वागत किया गया है। यह आपत्ति एक वकील ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने उठाई थी। आपत्ति का आधार यह था कि जस्टिस ठाकुर पहले स्टेट बार काउंसिल चुनावों के लिए रिटर्निंग ऑफिसर रह चुकी थीं और चुनाव से जुड़ी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस हिमा कोहली की अध्यक्षता वाले इलेक्शन ट्रिब्यूनल के पास पेंडिंग थीं।
यह बेंच – जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे – हाल ही में हुए चुनावों के बाद बार काउंसिल्स के गठन पर नज़र रख रही है। जब वकील ने जस्टिस ठाकुर को सदस्य बनाने पर आपत्ति जताई, तो CJI ने पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल के लिए उनके नॉमिनेशन का ज़ोरदार बचाव किया।
CJI कांत ने कहा, "आप लोगों को क्या समस्या है? पंजाब के लिए सबसे बेहतरीन और मज़बूत जजों में से एक को नॉमिनेट किया गया है। वे बहुत खुश हैं कि वह वहां हैं। लोग उनसे डरते हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब के लिए उनके नॉमिनेशन का अच्छा स्वागत हुआ है। 8 दिसंबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि स्टेट बार काउंसिल्स में महिलाओं को 30% प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, जिसमें से 20% सीटें चुनाव के ज़रिए और 10% को-ऑप्शन (सीधे सदस्य बनाने) के ज़रिए भरी जानी चाहिए।
उन्हें शीर्ष अदालत के एक आदेश के तहत सदस्य बनाया गया था। इस आदेश के अनुसार, हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को हर स्टेट बार काउंसिल में दो महिला सदस्यों को को-ऑप्ट करना था – ये सदस्य या तो हाई कोर्ट की पूर्व महिला जज होनी चाहिए थीं या फिर अच्छी प्रतिष्ठा वाली सीनियर महिला वकील। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने जस्टिस ठाकुर और सीनियर वकील गुरशरण कौर मान को पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल की महिला सदस्य के तौर पर नॉमिनेट किया।