Mohali एरोट्रोपोलिस प्रोजेक्ट पर विवाद

Update: 2026-04-19 07:23 GMT
Punjab.पंजाब: मोहाली में प्रस्तावित एरोट्रोपोलिस प्रोजेक्ट एक बार फिर विवादों में आ गया है। इस परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण को लेकर स्थानीय जमीन मालिकों और किसानों ने कड़ा विरोध जताया है। ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे अपनी जमीन को किसी भी कीमत पर अधिग्रहण के लिए नहीं देंगे।
GMADA द्वारा प्रस्तावित इस बड़े विकास प्रोजेक्ट के तहत दुराली गांव और आसपास के क्षेत्रों की भूमि को शामिल किया गया है। लेकिन स्थानीय निवासियों का कहना है कि उनकी जमीन को गलत तरीके से योजना में शामिल किया गया है और इससे उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा।
ग्रामीणों ने मांग की है कि दुराली गांव की जमीन को रेड ज़ोन इंडस्ट्रियल एरिया से बाहर किया जाए। उनका कहना है कि इस क्षेत्र को औद्योगिक या बड़े शहरी विकास प्रोजेक्ट में शामिल करना उनके लिए नुकसानदायक होगा, क्योंकि यह जमीन उनकी खेती और जीवन का मुख्य आधार है।
भूमि मालिकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें इस अधिग्रहण प्रक्रिया में उचित परामर्श नहीं दिया गया और न ही उनकी सहमति को प्राथमिकता दी गई। उनका कहना है कि सरकार और विकास प्राधिकरण को पहले स्थानीय लोगों की समस्याओं और जरूरतों को समझना चाहिए।
विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि यदि यह योजना लागू होती है, तो हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी। किसानों ने चेतावनी दी है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और तेज करेंगे।
दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि एरोट्रोपोलिस प्रोजेक्ट क्षेत्र के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है और इससे भविष्य में रोजगार और बुनियादी ढांचे में सुधार होगा। अधिकारियों का दावा है कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया नियमों के तहत और पारदर्शी तरीके से की जा रही है।
हालांकि, ग्रामीण इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि विकास के नाम पर उनकी जमीन छीनना उचित नहीं है और किसी भी योजना को लागू करने से पहले स्थानीय हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बड़ी परियोजनाओं में भूमि विवाद आम बात है, लेकिन समाधान बातचीत और पारदर्शिता के जरिए ही संभव है। यदि दोनों पक्ष मिलकर चर्चा करें तो किसी संतुलित समाधान तक पहुंचा जा सकता है।
फिलहाल, मोहाली में एरोट्रोपोलिस प्रोजेक्ट को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह विवाद और तेज हो सकता है, यदि सरकार और ग्रामीणों के बीच सहमति नहीं बनती है।
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