चंडीगढ़। सिख बंदियों की रिहाई समेत विभिन्न मांगों को लेकर शनिवार को चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। कौमी इंसाफ मोर्चा के बड़ी संख्या में समर्थक मोहाली में एकत्र हुए और चंडीगढ़ स्थित पंजाब राजभवन यानी लोकभवन की ओर मार्च करने का प्रयास किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को शहर में प्रवेश करने से रोकने के लिए कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की थी। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के आमने-सामने आने के बाद पुलिस ने पानी की बौछार और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
कौमी इंसाफ मोर्चा ने स्वतंत्रता दिवस पर मोहाली के वाईपीएस चौक से राजभवन की ओर मार्च निकालने की घोषणा की थी। इसके बाद चंडीगढ़ पुलिस ने मोहाली सीमा के साथ शहर के अन्य प्रवेश मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी। मोहाली बैरियर पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों और केंद्रीय सुरक्षा बलों को तैनात किया गया। पंचकूला, रोपड़ और सोलन की ओर से चंडीगढ़ आने वाले रास्तों पर भी निगरानी बढ़ाई गई।
प्रदर्शनकारियों ने दोपहर करीब साढ़े 12 बजे चंडीगढ़ की ओर बढ़ना शुरू किया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने कथित रूप से बैरिकेड हटाने और उनके बीच से निकलने का प्रयास किया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन चलाया और आंसू गैस के गोले छोड़े। के मुताबिक, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को चंडीगढ़ में प्रवेश करने से रोकने के लिए यह कार्रवाई की।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पुलिस ने ड्रोन की सहायता से भी आंसू गैस के गोले प्रदर्शनकारियों की दिशा में छोड़े। ड्रोन से पूरे क्षेत्र की निगरानी किए जाने की पुष्टि विभिन्न दृश्यों और रिपोर्टों से होती है, लेकिन ड्रोन के माध्यम से कितने गोले छोड़े गए, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। आंसू गैस का प्रभाव मोहाली की तरफ मौजूद लोगों तक पहुंचने से आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी की शिकायत भी सामने आई।
पुलिस का आरोप है कि भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने पथराव किया और ट्रैक्टर की मदद से बैरिकेडिंग हटाने की कोशिश की। इसके जवाब में आवश्यक बल प्रयोग किया गया। दूसरी ओर मोर्चा पदाधिकारियों ने कहा कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और पुलिस की ओर से की गई भारी बैरिकेडिंग के कारण तनाव बढ़ा। दोनों पक्षों के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
संभावित टकराव को देखते हुए कुछ पुलिसकर्मियों को धातु की जाली से बनी विशेष सुरक्षा पोशाक पहनाई गई थी। इसका उद्देश्य धारदार हथियार से संभावित हमले की स्थिति में सुरक्षाकर्मियों का बचाव करना बताया गया। पुलिस ने पहले ही प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी थी कि बैरिकेड तोड़ने या कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश होने पर कार्रवाई की जाएगी।
कौमी इंसाफ मोर्चा जनवरी 2023 से चंडीगढ़ के सेक्टर 52-53 और मोहाली के वाईपीएस चौक के पास धरना दे रहा है। मोर्चे की प्रमुख मांग अलग-अलग जेलों में बंद उन सिख कैदियों की रिहाई है, जिनके बारे में संगठन का दावा है कि वे निर्धारित सजा पूरी कर चुके हैं। प्रदर्शनकारी 2015 में फरीदकोट के बरगाड़ी में हुई बेअदबी और बहिबल कलां पुलिस फायरिंग के मामलों में भी न्याय की मांग कर रहे हैं।
जगतार सिंह हवारा के पिता और मोर्चे से जुड़े बापू गुरचरण सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। उन्होंने दावा किया कि मोर्चा तीन साल से अधिक समय से शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहा है, लेकिन सरकार ने मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी पुलिस का सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन अनावश्यक बैरिकेडिंग तनाव पैदा करती है।
गुरचरण सिंह ने बताया कि मोर्चे की एक मांग बंदी को 10 दिन की पैरोल देने की भी है, ताकि वह अपनी गंभीर रूप से बीमार और बिस्तर पर पड़ी मां से मुलाकात कर सके। मोर्चा नेताओं ने आरोप लगाया कि सजा पूरी कर चुके बंदियों को जेलों में रखना न्यायसंगत नहीं है।
टकराव के बाद चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई। पुलिस ने संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त जवान तैनात किए और प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर ड्रोन तथा अन्य साधनों से नजर रखी। यातायात प्रभावित होने के कारण वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी गई। देर तक सीमा क्षेत्र में तनाव बना रहा और पुलिस अधिकारी स्थिति नियंत्रित करने के प्रयास में जुटे रहे।