Balwinder Singh Dhaliwal ने उठाई सख्त कार्रवाई की मांग

Update: 2026-04-13 08:24 GMT
Jalandhar.जालंधर: पंजाब में ड्रग्स से होने वाली मौतों में लगातार बढ़ोतरी को लेकर चिंता जताते हुए वरिष्ठ नेता बलविंदर सिंह धालीवाल ने राज्य सरकार से सख्त और तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या अब गंभीर सामाजिक संकट का रूप ले चुकी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
धालीवाल ने कहा कि हाल के महीनों में युवाओं की मौतों के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें अधिकांश मामलों का संबंध नशे और ओवरडोज से बताया जा रहा है। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और इसके लिए ठोस रणनीति की जरूरत है।
उन्होंने आरोप लगाया कि नशे के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने में अभी तक अपेक्षित सफलता नहीं मिली है। इसके कारण ड्रग्स की उपलब्धता बनी हुई है और युवा इसकी चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
धालीवाल ने सरकार से मांग की कि नशा तस्करों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाए और इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि केवल गिरफ्तारियों से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पुनर्वास और जागरूकता कार्यक्रमों को भी मजबूत करना होगा।
उन्होंने प्रशासन से अपील की कि प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाई जाए और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए विशेष योजनाएं लागू की जाएं। उनका कहना है कि शिक्षा संस्थानों और समुदायों को भी इस लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक कारणों से भी जुड़ी हुई है। इसलिए इसके समाधान के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।
स्थानीय स्तर पर भी लोगों ने इस मुद्दे पर चिंता जताई है और सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की है। कई सामाजिक संगठनों का कहना है कि युवाओं को नशे से बचाने के लिए परिवार और समाज दोनों को मिलकर काम करना होगा।
धालीवाल ने यह भी कहा कि यदि इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में इसके परिणाम और भी भयावह हो सकते हैं। उन्होंने इसे “पीढ़ियों को प्रभावित करने वाला संकट” बताया।
कुल मिलाकर, बलविंदर सिंह धालीवाल द्वारा ड्रग्स से होने वाली मौतों पर जताई गई चिंता और सख्त कार्रवाई की मांग ने एक बार फिर इस गंभीर मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।
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