फिरोजपुर: फिरोजपुर छावनी क्षेत्र में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और लोगों की सुरक्षा को देखते हुए कैंटोनमेंट बोर्ड ने अभियान तेज कर दिया है। विशेष अभियान के तहत महज दो दिनों में 27 आवारा कुत्तों को पकड़ा गया है। कार्रवाई के दौरान कर्मचारियों की टीम ने उन इलाकों पर विशेष ध्यान दिया, जहां आवारा कुत्तों के झुंड और लोगों को काटने की शिकायतें ज्यादा सामने आ रही थीं। अभियान का उद्देश्य आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के साथ ही डॉग बाइट की घटनाओं को कम करना बताया जा रहा है। पकड़े गए कुत्तों के साथ पशु कल्याण से जुड़े नियमों के तहत आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

दो दिन में पकड़े गए 27 कुत्ते
छावनी क्षेत्र में अभियान के दौरान टीम ने अलग-अलग इलाकों से कुल 27 कुत्तों को पकड़ा। इसके लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों और जरूरी उपकरणों की मदद ली गई। अभियान आगे भी जारी रहने की बात कही गई है, ताकि ऐसे स्थानों को चिह्नित कर कार्रवाई की जा सके जहां आवारा कुत्तों की संख्या अधिक है। स्थानीय लोगों के मुताबिक कई इलाकों में रात और सुबह के समय कुत्तों के झुंड दिखाई देते हैं। इससे पैदल चलने वालों, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। दोपहिया वाहन चालकों के पीछे कुत्तों के दौड़ने से दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।
नसबंदी और टीकाकरण पर जोर
देश में आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए Animal Birth Control Rules, 2023 लागू हैं। इन नियमों के तहत स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण कार्यक्रम संचालित करने की है। सामान्य व्यवस्था में नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को उसी क्षेत्र में वापस छोड़ा जाता है जहां से उन्हें पकड़ा गया था इसलिए अभियान का मकसद कुत्तों को केवल सड़कों से हटाना नहीं, बल्कि उनकी आबादी को मानवीय तरीके से नियंत्रित करना और रेबीज के खतरे को कम करना भी है।
लोगों से भी सहयोग की अपील
आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई के साथ लोगों का सहयोग भी जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार खुले में कचरा और खाने का सामान फेंकने से कुत्तों के झुंड एक जगह जमा हो सकते हैं। ऐसे में कचरे का सही निपटान और निर्धारित स्थानों पर ही भोजन उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। वहीं कुत्ते के काटने या खरोंचने की स्थिति में घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए और बिना देरी किए चिकित्सा केंद्र पहुंचकर रेबीज से बचाव के लिए डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार संभावित रेबीज एक्सपोजर के बाद समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण है।
अभियान आगे भी रहेगा जारी
फिरोजपुर छावनी में दो दिनों में 27 आवारा कुत्तों को पकड़ने के बाद अब अन्य संवेदनशील इलाकों पर भी नजर रखी जा रही है। अभियान के जरिए डॉग बाइट की घटनाओं में कमी लाने और छावनी क्षेत्र में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
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