चंडीगढ़। पंजाब के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को साफ-सुथरा, सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर में स्कूल क्लीनलिनेस एंड रेडीनेस ड्राइव चलाने के निर्देश दिए हैं। सरकारी स्कूलों में परिसर की सफाई, कूड़े के ढेर और अव्यवस्थित व्यवस्था को लेकर सामने आ रही स्थिति को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को विशेष सफाई अभियान सुनिश्चित करने को कहा है। अभियान के दौरान स्कूलों में स्वच्छता के साथ-साथ विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं की भी जांच की जाएगी।
डायरेक्टर स्कूल शिक्षा (सेकेंडरी), पंजाब की ओर से 21 अगस्त को जारी पत्र में स्कूलों की वर्तमान स्थिति का उल्लेख करते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। विभाग के अनुसार, आम तौर पर देखने में आया है कि कई स्कूलों में परिसर और उसके आसपास का क्षेत्र पूरी तरह साफ नहीं रहता। कई स्थानों पर कूड़े के ढेर दिखाई देते हैं और स्कूल परिसर में अव्यवस्था बनी रहती है। ऐसी स्थिति विद्यार्थियों और अध्यापकों के स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं है।
शिक्षा विभाग ने कहा है कि स्कूलों में गंदगी और अस्वच्छ वातावरण के कारण विद्यार्थियों तथा अध्यापकों में विभिन्न प्रकार की बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है। बच्चों का अधिकतर समय स्कूल में बीतता है, इसलिए वहां स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं का बेहतर होना जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने स्कूल प्रमुखों को परिसर की स्थिति का तत्काल जायजा लेकर आवश्यक सुधार कराने के निर्देश दिए हैं।
अभियान के तहत स्कूल प्रमुख को पूरे स्कूल परिसर का फिजिकल वाकथ्रू करना होगा। इस दौरान परिसर के प्रत्येक हिस्से का निरीक्षण कर ऐसी कमियों की पहचान की जाएगी, जिन्हें तत्काल दूर किया जा सकता है। स्कूल के कमरों, बरामदों, खेल मैदान, प्रवेश और निकास मार्ग, आसपास के क्षेत्र तथा अन्य स्थानों की सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। जहां कूड़ा या अनावश्यक सामान जमा है, वहां तत्काल सफाई करवाने की व्यवस्था करनी होगी।
स्कूलों में शौचालयों की स्थिति भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। शौचालयों की नियमित सफाई, स्वच्छता और उपयोग की स्थिति की जांच की जाएगी। विद्यार्थियों को साफ और सुरक्षित शौचालय उपलब्ध कराना स्कूल प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है। इसके साथ ही पेयजल व्यवस्था का भी निरीक्षण किया जाएगा। यह देखा जाएगा कि विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध पानी की व्यवस्था साफ, सुरक्षित और सुचारु है या नहीं।
शिक्षा विभाग ने स्कूलों में बिजली संबंधी सुरक्षा पर भी ध्यान देने को कहा है। अभियान के दौरान बिजली की फिटिंग, तारों और अन्य विद्युत व्यवस्था की जांच की जाएगी, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका को समय रहते दूर किया जा सके। स्कूल परिसर में खुले या क्षतिग्रस्त तार, खराब फिटिंग अथवा अन्य जोखिम वाली स्थिति मिलने पर उसे ठीक कराने के निर्देश दिए गए हैं।
अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की जांच भी अभियान में शामिल की गई है। स्कूलों में उपलब्ध अग्निशमन यंत्रों की स्थिति और उनकी उपयोगिता को देखा जाएगा। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी आपात स्थिति में स्कूल प्रशासन के पास आवश्यक सुरक्षा संसाधन उपलब्ध हों। साथ ही प्राथमिक उपचार किट की उपलब्धता और उसकी स्थिति की भी जांच की जाएगी। जरूरत के अनुसार प्राथमिक उपचार से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
मिड-डे मील व्यवस्था को भी अभियान के दौरान जांचा जाएगा। भोजन तैयार करने वाले स्थान, साफ-सफाई, खाद्य सामग्री रखने की व्यवस्था और विद्यार्थियों को भोजन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर ध्यान दिया जाएगा। विभाग का मानना है कि विद्यार्थियों को मिलने वाला भोजन सुरक्षित और स्वच्छ परिस्थितियों में तैयार तथा वितरित होना चाहिए। इसलिए मिड-डे मील से संबंधित व्यवस्थाओं को भी स्कूल की समग्र स्वच्छता और सुरक्षा से जोड़कर देखा गया है।
विभाग के निर्देशों के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारियों को अभियान की निगरानी करनी होगी। स्कूल स्तर पर पाई जाने वाली कमियों को चिन्हित कर उन्हें दूर कराने की प्रक्रिया सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। अभियान का उद्देश्य केवल सफाई कराना नहीं, बल्कि स्कूलों में ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिससे स्वच्छता और सुरक्षा नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बन सके।
शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देश के बाद स्कूल प्रमुखों के सामने परिसर की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी बढ़ गई है। स्कूलों में सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ ही विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करनी होगी। विभाग का मानना है कि स्वच्छ वातावरण का सीधा असर विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और पढ़ाई पर पड़ता है।
सरकारी स्कूलों में चलाया जा रहा यह अभियान विद्यार्थियों के लिए स्वस्थ और सुरक्षित माहौल तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। स्कूलों में साफ परिसर, स्वच्छ शौचालय, सुरक्षित पेयजल, दुरुस्त बिजली व्यवस्था, अग्निशमन उपकरण और प्राथमिक उपचार जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने से विद्यार्थियों और शिक्षकों को बेहतर वातावरण मिल सकेगा। अब देखना होगा कि विभाग के निर्देशों के बाद स्कूल स्तर पर कितनी तेजी से कमियों को दूर किया जाता है और स्वच्छता एवं सुरक्षा व्यवस्था को नियमित रूप से बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।