चंडीगढ़: चंडीगढ़ की एक स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट ने न्याय की एक बड़ी मिसाल पेश करते हुए 10 साल की मासूम बच्ची के साथ शारीरिक छेड़छाड़ करने के मामले में 86 वर्षीय बुजुर्ग को दोषी ठहराया है। अदालत ने दोषी की उम्र को नजरअंदाज न करते हुए अपराध की गंभीरता को सर्वोपरि रखा और उसे पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में दोषी को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
चॉकलेट का लालच देकर की थी दरिंदगी
यह संवेदनशील और झकझोर देने वाला मामला नवंबर 2024 का है। पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, 7 नवंबर 2024 को आईटी पार्क थाना क्षेत्र के अंतर्गत रहने वाली एक 10 वर्षीय बच्ची अपने घर के पास स्थित एक दुकान पर दूध और ब्रेड लेने गई थी। दुकान चलाने वाले 86 वर्षीय बुजुर्ग ने बच्ची की मासूमियत का फायदा उठाने की कोशिश की। उसने बच्ची को बहलाने-फुसलाने के लिए चॉकलेट देने का बहाना बनाया और उसे पास बुलाकर उसके साथ गंभीर रूप से शारीरिक छेड़छाड़ की।
बच्ची ने मां को बताई आपबीती, दर्ज हुई FIR
घटना के बाद सहमी हुई बच्ची जब अपने घर पहुंची, तो उसने हिम्मत दिखाते हुए अपनी मां को पूरी आपबीती सुनाई। दुकानदार की इस घिनौनी हरकत को सुनकर मां के होश उड़ गए। उन्होंने बिना किसी देरी के तुरंत आईटी पार्क थाना पुलिस से संपर्क किया और आरोपी के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी बुजुर्ग के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74 और 75 सहित पाॅक्सो (POCSO) एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी थी।
जमानत पर था बाहर, दोषी करार होते ही भेजा गया जेल
मामले की कानूनी कार्यवाही के दौरान आरोपी बुजुर्ग पिछले दो साल से जमानत पर बाहर चल रहा था। स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में इस केस की लगातार सुनवाई हुई, जहां अभियोजन पक्ष ने पीड़ित बच्ची के बयान और साक्ष्यों को मजबूती से अदालत के सामने रखा। बुधवार को अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और सबूतों को देखने के बाद बुजुर्ग को पाॅक्सो एक्ट की धारा 10 के तहत दोषी करार दे दिया। जैसे ही अदालत ने उसे दोषी ठहराया, पुलिस ने उसे तुरंत हिरासत में ले लिया और जेल भेज दिया।
कानून में न्यूनतम सजा का प्रविधान
शुक्रवार को अदालत ने सजा की अवधि पर अपना अंतिम फैसला सुनाया। कोर्ट ने दोषी को पांच साल की कैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, पाॅक्सो एक्ट की धारा 10 के तहत न्यूनतम पांच वर्ष की सजा का ही प्रविधान है, जिसे कोर्ट ने लागू किया। यह फैसला समाज में यह कड़ा संदेश देता है कि मासूम बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में उम्र का कोई लिहाज नहीं किया जाएगा और कानून अपना काम पूरी सख्ती से करेगा।