पंजाब

हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, 58 वर्ष के बाद विस्तार पर रोक

Saba Naaz
17 July 2026 4:19 PM IST
हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, 58 वर्ष के बाद विस्तार पर रोक
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चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत दिव्यांग कर्मचारियों को बड़ा झटका दिया है। न्यायालय ने 58 वर्ष की आयु के बाद 60 वर्ष तक सेवा में बनाए रखने की मांग वाली 32 याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संशोधित नियम-143 के तहत 58 वर्ष के बाद किसी कर्मचारी को सेवा जारी रखने का कानूनी अधिकार नहीं है।

जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि 3 फरवरी 2026 को हरियाणा सिविल सेवा (जनरल) नियम, 2016 के नियम-143 में किए गए संशोधन के बाद सेवानिवृत्ति आयु 58 वर्ष निर्धारित है। अदालत ने कहा कि इस मामले पर पहले ही डिवीजन बेंच फैसला दे चुकी है, इसलिए एकलपीठ उसी विषय पर दोबारा विचार नहीं कर सकती।

याचिकाकर्ताओं ने अपनी सेवानिवृत्ति के आदेशों को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि वे दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत प्रमाणित बेंचमार्क दिव्यांग कर्मचारी हैं। उन्होंने तर्क दिया कि दिव्यांग कर्मचारियों को 60 वर्ष तक सेवा का लाभ मिलना चाहिए।

कर्मचारियों की ओर से दलील दी गई कि हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने जोरा सिंह बनाम हरियाणा राज्य मामले में कहा था कि केवल 70 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले कर्मचारियों तक सेवा विस्तार सीमित नहीं किया जा सकता। सभी बेंचमार्क दिव्यांग कर्मचारियों को इसका लाभ मिलना चाहिए। इसी आधार पर कई कर्मचारियों को 60 वर्ष तक सेवा जारी रखने के आदेश भी मिले थे।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि 3 फरवरी 2026 को किए गए नियम-143 के संशोधन को पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जिन कर्मचारियों को पहले ही 60 वर्ष तक सेवा का अधिकार मिल चुका था, उनके अधिकार समाप्त नहीं किए जा सकते।

वहीं हरियाणा सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि इस मुद्दे पर पहले ही डिवीजन बेंच अपना फैसला सुना चुकी है। सरकार ने दलील दी कि संशोधित नियम-143 लागू होने के बाद कोई भी कर्मचारी 58 वर्ष से अधिक सेवा जारी रखने का दावा नहीं कर सकता।

हाई कोर्ट ने सरकार की दलील को स्वीकार करते हुए कहा कि किसी कर्मचारी को सेवानिवृत्ति आयु को लेकर स्थायी या अपरिवर्तनीय अधिकार प्राप्त नहीं होता। संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत राज्य सरकार को सेवा शर्तों में बदलाव करने का अधिकार है। इसमें सेवानिवृत्ति की आयु भी शामिल है।

अदालत ने कहा कि न्यायिक अनुशासन के अनुसार डिवीजन बेंच के फैसले का पालन करना जरूरी है। इसलिए एकलपीठ इस मामले में अलग निर्णय नहीं दे सकती। कोर्ट ने सभी 32 याचिकाओं और उनसे जुड़े लंबित आवेदनों को भी समाप्त कर दिया।

हालांकि, हाई कोर्ट ने कर्मचारियों को आंशिक राहत भी दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन कर्मचारियों ने कोर्ट के अंतरिम आदेश के आधार पर 58 वर्ष की आयु के बाद भी सेवा की है, उनके वेतन, पेंशन और अन्य सेवा लाभ सुरक्षित रहेंगे। संबंधित विभाग प्रत्येक कर्मचारी के मामले की अलग-अलग जांच कर नियमानुसार फैसला करेंगे।

इस फैसले के बाद हरियाणा सरकार के विभागों में कार्यरत दिव्यांग कर्मचारियों के लिए 58 वर्ष के बाद सेवा विस्तार का रास्ता बंद हो गया है। कोर्ट के आदेश से अब सेवानिवृत्ति नियमों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है।

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