'पुनश्च पृथ्वी' अभियान का तीसरा संस्करण 2 अक्टूबर से, बाइसन बना मैस्कॉट
भुवनेश्वर। पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 'ईस्टर्न मीडिया लिमिटेड' की पहल 'पुनश्च पृथ्वी' अभियान का तीसरा संस्करण 2 अक्टूबर से शुरू होने जा रहा है। अभियान की शुरुआत से पहले सोमवार को भुवनेश्वर स्थित 'आमा ओडिशा' कार्यालय में इसके आधिकारिक मैस्कॉट 'बाइसन' का अनावरण किया गया।
ओडिशा के वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया ने विशेष कार्यक्रम के दौरान मैस्कॉट का अनावरण किया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और वन्यजीवों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। इस दौरान अभियान के उद्देश्यों और आने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा पर भी बात हुई।
मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया ने कहा कि पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर जनभागीदारी बढ़ाना आज के समय की बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का असर केवल जंगलों या वन्यजीवों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव खेती, जलस्रोतों, मौसम, आजीविका और आम लोगों के जीवन पर भी पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि 'संबाद' ने विधानसभा क्षेत्र स्तर पर आयोजित अपने 'जलवायु पंचायत' कार्यक्रमों के जरिए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। ऐसे कार्यक्रमों के जरिए स्थानीय स्तर पर पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं और समाधान को सामने लाने का अवसर मिलता है।
मंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर केवल सरकारी स्तर पर काम करना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए लोगों, सामाजिक संगठनों, मीडिया संस्थानों और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। जनजागरूकता बढ़ने से पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना मजबूत हो सकती है।
'पुनश्च पृथ्वी' अभियान के तीसरे संस्करण में बाइसन को मैस्कॉट के रूप में चुना गया है। मंत्री ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि बाइसन जैसा वन्यजीव लोगों का ध्यान जंगलों और जैव विविधता के संरक्षण की ओर आकर्षित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि ओडिशा में बाइसन की आबादी धीरे-धीरे कम हो रही है। ऐसे में इस प्रजाति को अभियान का प्रतीक बनाना वन्यजीव संरक्षण का संदेश देने में मददगार साबित हो सकता है। बाइसन को आमतौर पर भारतीय गौर के नाम से भी जाना जाता है और यह जंगलों के पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
मंत्री के अनुसार ओडिशा में बाइसन की सबसे अधिक आबादी देबरीगढ़ क्षेत्र में पाई जाती है। यहां 885 से अधिक बाइसन मौजूद बताए गए हैं। इसके अलावा सिमलीपाल, नयागढ़ और सतकोसिया के जंगलों में भी यह प्रजाति पाई जाती है।
कार्यक्रम में बाइसन की घटती संख्या को लेकर चिंता जताई गई। विशेषज्ञों और पर्यावरण से जुड़े लोगों का मानना है कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा, पर्याप्त जंगल क्षेत्र और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने जैसे कदम उनके संरक्षण के लिए बेहद जरूरी हैं।
'पुनश्च पृथ्वी' अभियान का उद्देश्य केवल वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं रहेगा। इसके जरिए जलवायु परिवर्तन, वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक प्रदूषण, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग जैसे विषयों को भी लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
अभियान के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है। विशेष रूप से युवाओं, विद्यार्थियों और ग्रामीण समुदायों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने पर जोर दिया जा सकता है। इसका उद्देश्य पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को केवल चर्चा तक सीमित न रखकर व्यवहार में बदलाव की दिशा में आगे बढ़ाना है।
जलवायु परिवर्तन के कारण बदलते मौसम पैटर्न, अनियमित बारिश, बढ़ते तापमान और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाओं ने पर्यावरण संरक्षण की जरूरत को और महत्वपूर्ण बना दिया है। ऐसे में अभियान के जरिए लोगों को अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण के अनुकूल आदतें अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि स्थानीय स्तर पर होने वाले छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं। पानी बचाना, पेड़ों की रक्षा करना, प्लास्टिक का कम इस्तेमाल और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील व्यवहार जैसे कदम पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकते हैं।
'जलवायु पंचायत' जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में स्थानीय समस्याओं पर चर्चा की गई है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां हर क्षेत्र में अलग-अलग रूप में सामने आती हैं।
कहीं जल संकट बड़ी समस्या है तो कहीं जंगलों की कटाई, वन्यजीव संघर्ष या प्रदूषण चिंता का विषय है। ऐसे में स्थानीय जरूरतों को समझकर समाधान तैयार करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
बाइसन को अभियान का मैस्कॉट बनाए जाने से वन्यजीव संरक्षण को एक अलग पहचान मिलने की उम्मीद है। आयोजकों का मानना है कि प्रतीकात्मक रूप से किसी महत्वपूर्ण वन्यजीव को अभियान से जोड़ने पर लोगों का ध्यान उसके संरक्षण और प्राकृतिक आवास की सुरक्षा की ओर अधिक प्रभावी तरीके से खींचा जा सकता है।
ओडिशा प्राकृतिक संसाधनों, जंगलों और जैव विविधता से समृद्ध राज्य है। यहां कई वन्यजीव प्रजातियों के साथ बड़े वन क्षेत्र मौजूद हैं। इन क्षेत्रों का संरक्षण न केवल पर्यावरण बल्कि स्थानीय समुदायों और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
2 अक्टूबर से शुरू होने वाला 'पुनश्च पृथ्वी' अभियान इसी सोच के साथ लोगों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की कोशिश करेगा। तीसरे संस्करण के जरिए अभियान को और व्यापक स्तर पर पहुंचाने तथा जलवायु परिवर्तन के मुद्दे को स्थानीय समुदायों के बीच मजबूत तरीके से रखने की तैयारी की गई है।
बाइसन मैस्कॉट के अनावरण के साथ अभियान की औपचारिक गतिविधियों की शुरुआत हो गई है। अब 2 अक्टूबर से अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए पर्यावरण, वन्यजीव संरक्षण और जलवायु परिवर्तन पर जनजागरूकता बढ़ाने की दिशा में अभियान आगे बढ़ेगा।