Rayagada : भीड़ हिंसा मामले को ‘रेड फ्लैग’ कैटेगरी में रखने की सिफारिश, 21 गिरफ्तार

Update: 2026-06-21 05:37 GMT

Odisha ओडिशा: रायगड़ा जिले में कल्याणसिंहपुर थाना क्षेत्र में हुई भीड़ हिंसा के मामले को लेकर जिला पुलिस ने गंभीर कदम उठाया है। पुलिस ने इस घटना को ‘रेड फ्लैग’ कैटेगरी में रखने की सिफारिश की है। इस मामले में दो एनजीओ कार्यकर्ताओं को बच्चा चोर समझकर भीड़ द्वारा बेरहमी से पीटने की घटना सामने आई थी, जिसने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया था।

रायगड़ा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) राज प्रसाद ने बताया कि जिला पुलिस की ओर से विभाग को इस मामले को ‘रेड फ्लैग’ केस के रूप में वर्गीकृत करने का अनुरोध भेजा गया है। उन्होंने कहा कि घटना की गंभीरता को देखते हुए यह कदम आवश्यक माना गया है, ताकि जांच और कानूनी प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा सके।

यह घटना 16 जून को कंडुलगुडा गांव के पास हुई थी, जो कल्याणसिंहपुर पुलिस थाना क्षेत्र में आता है। उस समय दो एनजीओ कार्यकर्ता—बिहार की एक युवती और उसका पुरुष साथी—कंधमाल जिले के डारिंगबाड़ी से कालाहांडी जिले के थुआमूल रामपुर की ओर जा रहे थे। दोनों की उम्र लगभग 20 वर्ष बताई गई है।

पुलिस के अनुसार, रास्ते में अफवाहों के कारण स्थानीय ग्रामीणों में डर और भ्रम फैल गया, जिसके चलते भीड़ ने दोनों को बच्चा चोर समझ लिया। इसके बाद भीड़ ने उनके साथ मारपीट की, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए अब तक 21 लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने बताया कि कई अन्य संदिग्ध अभी भी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है। इसके लिए अलग-अलग पुलिस टीमों का गठन किया गया है, जो संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।

एसपी राज प्रसाद ने कहा कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि भीड़ हिंसा जैसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की भी योजना बनाई जा रही है।

पुलिस का मानना है कि अफवाहों और गलत जानकारी के कारण इस तरह की घटनाएं तेजी से बढ़ती हैं, जिससे निर्दोष लोगों को नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए सोशल मीडिया और स्थानीय संचार माध्यमों पर फैलने वाली अफवाहों पर नियंत्रण जरूरी है।

इस घटना ने न केवल ओडिशा बल्कि पूरे देश में चिंता पैदा की है। मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मामले की कड़ी निंदा की है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

कुल मिलाकर, रायगड़ा की यह घटना एक बार फिर भीड़ हिंसा और अफवाहों के खतरनाक प्रभावों को उजागर करती है, जहां गलतफहमी के कारण दो निर्दोष लोगों को गंभीर हिंसा का सामना करना पड़ा।

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