ओडिशा में तटबंध क्षतिग्रस्त, ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी

Update: 2026-08-02 10:22 GMT

भुवनेश्वर। ओडिशा के भद्रक जिले में सालंदी नदी का तटबंध टूटने से बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। तटबंध टूटने के बाद नदी का पानी तेजी से आसपास के गांवों में फैल गया, जिससे करीब 20 गांव जलमग्न हो गए हैं। इस बाढ़ से लगभग 15 हजार लोग प्रभावित हुए हैं। कई परिवारों के घरों में पानी भर गया है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है। वहीं, राहत सामग्री, स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, भद्रक जिले की अर्ण्णपाल पंचायत क्षेत्र में मलिकसाही के पास आधी रात के समय सालंदी नदी का तटबंध टूट गया। देखते ही देखते नदी का पानी खेतों और रिहायशी इलाकों में प्रवेश कर गया। सुबह जब ग्रामीणों की आंख खुली तो उनके सामने चारों ओर पानी भरा हुआ था। अचानक आई बाढ़ से लोगों को अपना सामान समेटने तक का मौका नहीं मिल सका।

बाढ़ का सबसे ज्यादा असर अर्ण्णपाल पंचायत के साथ-साथ बिलणा, बोडक, बारुआ और तालगोपबिंधा समेत कई इलाकों में देखने को मिल रहा है। इन क्षेत्रों के कई संपर्क मार्ग पानी में डूब गए हैं, जिससे ग्रामीणों का आसपास के इलाकों से संपर्क प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर लोग अब भी जलभराव के बीच फंसे हुए हैं और मदद का इंतजार कर रहे हैं।

बाढ़ प्रभावित परिवारों ने बताया कि कच्चे मकानों और छप्पर वाले घरों में पानी घुसने के बाद उन्हें मजबूरी में स्कूल भवनों और अन्य सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। प्रशासन की ओर से राहत शिविरों में भोजन उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि राहत सामग्री पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच रही है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई इलाकों में सूखा राशन और पका हुआ भोजन नियमित रूप से नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा दवाइयों और स्वच्छ पेयजल की कमी भी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। बाढ़ के कारण कई नलकूप पानी में डूब गए हैं, जिससे ग्रामीणों के सामने पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

बाढ़ प्रभावित भक्ती ब्रह्मपुर गांव के निवासी रमाकांत नायक ने बताया कि शुरुआती दिनों में लोगों को पर्याप्त राहत सामग्री नहीं मिली। उन्होंने कहा कि कई घरों में अभी भी पानी भरा हुआ है। चूल्हे डूब चुके हैं और खेती पूरी तरह बर्बाद हो गई है। ऐसे हालात में लोगों को भोजन और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि बाढ़ के कारण सांपों का खतरा बढ़ गया है। रात के समय लोग डर के माहौल में रहने को मजबूर हैं। बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने में भी परेशानी हो रही है। कई जगहों पर एंबुलेंस सेवा समय पर नहीं पहुंच पाने से मरीजों और बुजुर्गों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

वहीं, स्थानीय लोगों ने सालंदी नदी के तटबंध निर्माण की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि हाल ही में लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए तटबंध की मजबूती पर ध्यान नहीं दिया गया, जिसके कारण वह नदी के बढ़ते जलस्तर का दबाव नहीं झेल सका। तटबंध टूटने के बाद बड़े इलाके में पानी फैल गया और हजारों लोगों को नुकसान उठाना पड़ा।

बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन से कम से कम सात दिनों तक पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और राहत सामग्री की व्यवस्था बढ़ाने की अपील की है। शुशुआ, रजुआलिबिंधा, लेंजरा और तालगोपबिंधा समेत कई गांवों के लोगों ने जल्द राहत और पुनर्वास की मांग उठाई है।

हालांकि बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने लगा है, लेकिन प्रभावित परिवारों के सामने अब भी बड़ी चुनौतियां हैं। घरों की मरम्मत, खेती के नुकसान की भरपाई और सामान्य जीवन वापस पटरी पर लाना प्रशासन के लिए बड़ी जिम्मेदारी बनी हुई है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि सरकार जल्द प्रभावी कदम उठाकर राहत और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाएगी।

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