राउरकेला। विकास कार्यों के बीच आम लोगों की परेशानियां किस तरह बढ़ सकती हैं, इसका एक गंभीर मामला हेमगिर ब्लॉक के लईकेरा पंचायत स्थित ठिठईटांगर गांव में सामने आया है। रेलवे विभाग की ओर से सड़क के बीचों-बीच लोहे के खंभे लगाए जाने के बाद गांव का रास्ता बाधित हो गया है। इसका सबसे बड़ा खामियाजा ग्रामीणों को आपातकालीन स्थिति में भुगतना पड़ रहा है। हालात ऐसे बने कि एक बीमार बुजुर्ग महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए परिजनों को उसे खटिया पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, ठिठईटांगर गांव की रहने वाली 65 वर्षीय सावित्री ध्रुआ तेज बुखार के कारण गंभीर रूप से बीमार हो गई थीं। उनकी हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उन्हें इलाज के लिए हेमगिर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाने की कोशिश की। इसके लिए एंबुलेंस को भी बुलाया गया, लेकिन गांव के अंदर पहुंचने का रास्ता बंद होने के कारण एंबुलेंस महिला के घर तक नहीं पहुंच सकी।
ग्रामीणों के अनुसार, रेलवे विभाग ने गांव की मुख्य सड़क के बीचों-बीच लोहे के खंभे लगा दिए हैं। इन खंभों के कारण बड़े वाहनों के साथ-साथ आपातकालीन सेवाओं का गांव तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। मजबूरी में परिजनों ने बीमार महिला को खटिया पर लिटाया और कंधों पर उठाकर रेलवे लाइन पार कराते हुए मुख्य सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद उन्हें एंबुलेंस की मदद से अस्पताल ले जाया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे विभाग ने गांव के रास्ते पर ओवरब्रिज बनाने का आश्वासन दिया था। ग्रामीणों की मांग थी कि रेलवे लाइन के कारण आवागमन प्रभावित न हो और लोगों के लिए सुरक्षित रास्ते की व्यवस्था की जाए। उस समय रेलवे अधिकारियों ने भी भरोसा दिलाया था कि ग्रामीणों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी और ओवरब्रिज का निर्माण कराया जाएगा।
लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि ओवरब्रिज बनाने के बजाय रेलवे ने अचानक सड़क के दोनों ओर लोहे के खंभे लगा दिए। इससे गांव में आने-जाने का रास्ता संकरा और बाधित हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह कदम बिना किसी पूर्व सूचना और बिना गांव वालों से चर्चा किए उठाया गया है।
गौरतलब है कि झारसुगुड़ा से विभिन्न खदान साइडिंग तक रेल संपर्क स्थापित करने के लिए रेलवे लाइन का विस्तार किया गया है। एमसीएल खदान से कोयला परिवहन के उद्देश्य से रेलवे विभाग ने बालीचुआं और ठिठईटांगर होते हुए सरडेगा तक नई रेलवे लाइन बिछाई है। इसी रेल मार्ग के कारण गांव की सड़क प्रभावित हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बाधित होने से सिर्फ आम आवाजाही ही प्रभावित नहीं हुई है, बल्कि मरीजों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ सकती है। अगर किसी व्यक्ति की हालत गंभीर हो जाए तो समय पर एंबुलेंस या अन्य वाहन नहीं पहुंच पाएंगे, जिससे जान का खतरा भी बढ़ सकता है।
ठिठईटांगर और आसपास के गांवों के लोगों ने जिला प्रशासन से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। ग्रामीणों ने आग्रह किया है कि रेलवे विभाग के साथ समन्वय कर जल्द से जल्द रास्ते की समस्या का समाधान निकाला जाए और लोगों के लिए सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था की जाए।
फिलहाल ग्रामीण रेलवे और प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनका कहना है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन इसके चलते आम जनता की मूलभूत सुविधाएं और आपातकालीन सेवाएं प्रभावित नहीं होनी चाहिए।