Odisha ओडिशा: ओडिशा और ओडिया समुदायों में इन दिनों पारंपरिक ‘राजा’ पर्व की तैयारियां जोरों पर हैं। यह त्योहार नारीत्व और धरती की उपजाऊ शक्ति के पुनर्जागरण का प्रतीक माना जाता है। हर वर्ष मनाया जाने वाला यह उत्सव खेती और प्रकृति से जुड़े गहरे सांस्कृतिक विश्वासों को दर्शाता है, जिसमें धरती को भी एक जीवित शक्ति के रूप में देखा जाता है।
‘राजा’ शब्द ‘रजस्वला’ से निकला माना जाता है, जिसका अर्थ मासिक धर्म वाली महिला होता है। यह पर्व न केवल ओडिशा में बल्कि देश-विदेश में रहने वाले ओडिया समुदाय द्वारा भी मनाया जाता है। इस परंपरा के अनुसार धरती को भी महिलाओं की तरह मासिक धर्म चक्र से गुजरने वाली माना जाता है, जिसमें एक विशेष अवधि को आराम और पुनर्जनन का समय समझा जाता है। इस दौरान कृषि कार्यों पर रोक लगाई जाती है, ताकि धरती को “विश्राम” मिल सके।
यह पर्व महिलाओं को समर्पित एक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिसमें नारी सम्मान और उनकी भूमिका को प्रमुखता दी जाती है। इस दौरान महिलाओं को विशेष रूप से नए कपड़े, आभूषण और पारंपरिक व्यंजन दिए जाते हैं। साथ ही उन्हें घरेलू कामों से मुक्त रखा जाता है, ताकि वे इस समय को आनंद और विश्राम के रूप में मना सकें।
‘राजा’ पर्व के पहले दिन को ‘पहिली राजा’ कहा जाता है। यह उत्सव की शुरुआत का प्रतीक होता है। दूसरे दिन को आषाढ़ महीने की शुरुआत के रूप में ‘मिथुन संक्रांति’ मनाया जाता है। तीसरे दिन को ‘बासी राजा’ कहा जाता है, जबकि चौथे दिन ‘बसुमती गधुआ’ मनाया जाता है, जिसे धरती के मासिक धर्म चक्र के समापन का प्रतीक माना जाता है।
इस दौरान महिलाएं पारंपरिक रूप से सजती-संवरती हैं। वे नए वस्त्र पहनती हैं, पैरों में आलता लगाती हैं और माथे पर कुमकुम सजाती हैं। आज के समय में यह परंपरा और भी रंगीन हो गई है, जिसमें महिलाएं हाथों पर मेहंदी लगवाती हैं और नाखूनों की सुंदर सजावट (नेल आर्ट) भी कराती हैं। परिवार और समुदाय मिलकर इस पर्व को उत्साह और सांस्कृतिक गौरव के साथ मनाते हैं।
‘राजा’ पर्व न केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव है, बल्कि यह प्रकृति और नारीत्व के बीच संबंध को भी दर्शाता है। यह त्योहार सामाजिक संदेश भी देता है कि महिलाओं का सम्मान और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ओडिया समाज में यह पर्व पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं का जीवंत उदाहरण है, जो आज भी अपनी सांस्कृतिक पहचान को मजबूती से बनाए हुए है।