रायगढ़ा : ओडिशा के रायगढ़ा जिले में मलेरिया का प्रकोप लगातार चिंता बढ़ा रहा है। जिले में एक और स्कूली छात्र की मलेरिया से मौत हो गई है। एक सप्ताह के भीतर मलेरिया से होने वाली यह दूसरी मौत है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों और बीमारी की रोकथाम को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
मृतक छात्र की पहचान 9 वर्षीय जयसेन कंडागरी के रूप में हुई है। जयसेन चौथी कक्षा का छात्र था। उसकी हालत बिगड़ने के बाद उसे इलाज के लिए बरहामपुर स्थित महाराजा कृष्ण चंद्र (MKCG) मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा था, लेकिन मंगलवार को उसकी मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार, जयसेन को कुछ समय पहले बुखार और मलेरिया के लक्षण दिखाई दिए थे। शुरुआत में उसका स्थानीय स्तर पर इलाज कराया गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर उसे बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी स्थिति गंभीर होती गई और आखिरकार उसने दम तोड़ दिया।
इस घटना के बाद जिले में स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। रायगढ़ा जिले में मलेरिया पहले से ही एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती रहा है। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में मलेरिया के मामले अधिक सामने आते हैं। बारिश के मौसम में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने के कारण संक्रमण का खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है।
एक सप्ताह के भीतर मलेरिया से दूसरी मौत ने प्रशासन को सतर्क कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाने और लोगों को बीमारी से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करने की कोशिश की जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मलेरिया से बचाव के लिए समय पर जांच और इलाज बेहद जरूरी है। लंबे समय तक बुखार रहने, ठंड लगने, कमजोरी और शरीर में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। देरी होने पर बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
रायगढ़ा जैसे आदिवासी बहुल और पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच कई बार चुनौतीपूर्ण होती है। दूरदराज गांवों में रहने वाले लोगों को अस्पताल पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि ऐसे इलाकों में मलेरिया जैसी बीमारियों का प्रभाव ज्यादा देखने को मिलता है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से आमतौर पर मलेरिया नियंत्रण के लिए दवा वितरण, मच्छरदानी उपलब्ध कराने, जांच शिविर लगाने और जागरूकता अभियान चलाने जैसे कदम उठाए जाते हैं। हालांकि, लगातार सामने आ रहे मामलों के कारण इन प्रयासों को और मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि गांवों में स्वास्थ्य टीमों की नियमित निगरानी बढ़ाई जाए और बुखार से पीड़ित लोगों की तुरंत जांच की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर इलाज मिलने से कई गंभीर मामलों को रोका जा सकता है।
जयसेन कंडागरी की मौत ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर चर्चा तेज कर दी है। प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती मलेरिया के प्रसार को रोकना और लोगों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना है।
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि मलेरिया से बचाव के लिए लोगों को अपने आसपास साफ-सफाई बनाए रखने, पानी जमा नहीं होने देने और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने चाहिए। साथ ही किसी भी तरह के बुखार को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
रायगढ़ा जिले में लगातार सामने आ रहे मलेरिया के मामलों को देखते हुए आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर सभी की नजर रहेगी।