
भुवनेश्वर : ओडिशा में स्कूल की किताबों की तैयारी और प्रकाशन में कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद बढ़ गया है। मामले की जांच कर रही ओडिशा क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) के पूर्व निदेशक मनोज पाधी को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई कक्षा पहली से आठवीं तक की नई प्रकाशित पाठ्य पुस्तकों में मिली कथित गलतियों और गड़बड़ियों की जांच के तहत की गई है।
जानकारी के अनुसार, नई किताबों में कई त्रुटियां सामने आने के बाद राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया था। इसके बाद मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने SCERT के तत्कालीन निदेशक मनोज पाधी को निलंबित कर दिया था। अब क्राइम ब्रांच इस पूरे मामले में उनकी भूमिका और किताबों की तैयारी से जुड़े फैसलों की जांच कर रही है।
क्राइम ब्रांच ने मुख्यमंत्री के निर्देश और SCERT की वर्तमान निदेशक मधुस्मिता साहू की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर जांच शुरू की है। अधिकारियों के अनुसार, किताबों के निर्माण, समीक्षा, मंजूरी और प्रकाशन की पूरी प्रक्रिया की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित गलतियां किस स्तर पर हुईं।
मामले की जांच के लिए क्राइम ब्रांच ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इस टीम की निगरानी क्राइम ब्रांच के पुलिस अधीक्षक (SP) स्तर के अधिकारी कर रहे हैं। जांच अधिकारी के रूप में पुलिस उपाधीक्षक (DSP) नरेंद्र कुमार बेहरा को नियुक्त किया गया है।
SIT को जिम्मेदारी दी गई है कि वह स्कूल पाठ्य पुस्तकों की तैयारी से जुड़े सभी चरणों की समीक्षा करे। इसमें किताबों की सामग्री तैयार करने, विशेषज्ञों द्वारा जांच, अंतिम मंजूरी और प्रकाशन प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की जांच शामिल है।
क्राइम ब्रांच यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि किताबों में सामने आई गलतियां लापरवाही का परिणाम थीं या इसके पीछे कोई अन्य कारण था। जांच एजेंसी संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और किताब तैयार करने वाली टीम से भी पूछताछ कर सकती है।
कक्षा पहली से आठवीं तक की किताबों में गलतियां सामने आने के बाद अभिभावकों, शिक्षकों और विभिन्न संगठनों ने सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि बच्चों की शिक्षा से जुड़ी पुस्तकों में ऐसी त्रुटियां गंभीर मामला हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
राज्य सरकार ने भी इस मामले को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सरकार का कहना है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और सही शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
SCERT राज्य में स्कूली शिक्षा से जुड़ी पाठ्य सामग्री तैयार करने और शैक्षणिक नीतियों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में संस्था से जुड़ी किताबों में गलतियों का मामला सामने आने के बाद इसकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं।
जांच एजेंसी अब यह भी पता लगाएगी कि किताबों को प्रकाशित करने से पहले उनकी समीक्षा किस स्तर पर की गई थी और क्या तय प्रक्रियाओं का पालन किया गया था। इसके अलावा, किताबों में सुधार के लिए उठाए गए कदमों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, जांच अभी शुरुआती चरण में है और आगे और लोगों से पूछताछ की जा सकती है। यदि जांच में किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
इस मामले ने ओडिशा में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक नई बहस शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाठ्य पुस्तकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत जांच व्यवस्था और जवाबदेही तय करना जरूरी है।
फिलहाल क्राइम ब्रांच मनोज पाधी से पूछताछ कर रही है और जांच टीम किताबों की तैयारी से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा में जुटी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना है।





