ओडिशा में चीनी की कीमतों से राहत नहीं, खुदरा बाजार में अब भी 75 रुपये किलो तक दाम
भुवनेश्वर। ओडिशा के खुदरा बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं से लेकर छोटे कारोबारियों तक की चिंता बढ़ा दी है। सप्लाई में किसी तरह की कमी नहीं होने के बावजूद बाजार में चीनी के दाम अभी भी ऊंचे बने हुए हैं। कई जगहों पर चीनी करीब 75 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है, जबकि कुछ इलाकों में इससे भी अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
चीनी की बढ़ी हुई कीमतों का सबसे ज्यादा असर मिठाई दुकानदारों, चाय स्टॉल संचालकों और छोटे खाद्य कारोबारियों पर पड़ रहा है। कारोबारियों का कहना है कि चीनी की कीमत बढ़ने से उत्पादन लागत बढ़ गई है, लेकिन ग्राहकों पर पूरा बोझ डालना भी आसान नहीं है। इससे उनके मुनाफे पर सीधा असर पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, पिछले दो महीनों में चीनी की कीमतों में अचानक तेजी देखने को मिली। पहले जहां चीनी की कीमत करीब 4,000 रुपये प्रति क्विंटल थी, वहीं यह बढ़कर लगभग 6,400 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई। इस बढ़ोतरी का असर सीधे थोक और खुदरा बाजार पर दिखाई दिया।
थोक बाजार में भी चीनी के दाम तेजी से बढ़े। पहले जहां चीनी करीब 40 रुपये प्रति किलो के भाव पर उपलब्ध थी, वहीं इसकी कीमत बढ़कर 64 से 66 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। इसके बाद खुदरा विक्रेताओं ने परिवहन खर्च और अन्य लागत को जोड़कर उपभोक्ताओं को ऊंची कीमत पर चीनी बेचना शुरू कर दिया।
हालांकि, अब थोक बाजार में चीनी की कीमतों में कुछ गिरावट आई है। करीब 400 रुपये प्रति क्विंटल की कमी के बाद थोक भाव लगभग 6,000 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया है। वर्तमान में थोक बाजार में चीनी करीब 60 से 62 रुपये प्रति किलो के भाव पर उपलब्ध है।
इसके बावजूद खुदरा बाजार में इसका असर पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहा है। उपभोक्ताओं को अभी भी चीनी ऊंची कीमतों पर खरीदनी पड़ रही है। खुदरा बाजार में कीमतें अब भी करीब 75 रुपये प्रति किलो तक बनी हुई हैं। इससे सवाल उठ रहे हैं कि थोक कीमतों में आई कमी का लाभ ग्राहकों तक क्यों नहीं पहुंच रहा है।
व्यापारियों का कहना है कि खुदरा कीमतों में केवल थोक भाव ही नहीं बल्कि परिवहन, भंडारण, दुकान का खर्च और अन्य लागत भी शामिल होती है। इसी वजह से थोक कीमत कम होने के बाद भी खुदरा बाजार में तुरंत बड़ा बदलाव नहीं दिखाई देता।
वहीं, मिठाई कारोबारियों का कहना है कि चीनी के दाम बढ़ने से त्योहारों और खास मौकों पर मिठाई तैयार करने की लागत बढ़ गई है। कई दुकानदारों को मजबूरी में मिठाइयों के दाम बढ़ाने पड़े हैं। चाय की दुकानों पर भी इसका असर देखा जा रहा है।
ओडिशा के बाजार में चीनी की कीमतों को लेकर उपभोक्ता भी परेशान हैं। आम परिवारों का कहना है कि पहले ही कई जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़े हुए हैं, ऐसे में चीनी जैसी रोजमर्रा की चीज महंगी होने से घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, चीनी की कीमतों में उतार-चढ़ाव उत्पादन, मांग, आपूर्ति व्यवस्था और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। हालांकि, जब थोक कीमतों में कमी आती है तो उसका लाभ धीरे-धीरे खुदरा बाजार में भी दिखाई देना चाहिए।
प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से बाजार की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। यदि कहीं मनमानी कीमत वसूलने या जमाखोरी की शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल ओडिशा के उपभोक्ताओं को चीनी की कीमतों में बड़ी राहत का इंतजार है। थोक बाजार में आई गिरावट के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों में भी कमी आ सकती है।