कटक: ओडिशा हाई कोर्ट ने चंडीखोल के रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर (RTO) ऑफिस में एक कर्मचारी को बहाल करने के आदेश का पालन न करने के मामले में राज्य के ट्रांसपोर्ट और फाइनेंस विभागों के चार सीनियर अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।

संबंधित कर्मचारी गणेश चंद्र पात्रा की ओर से दायर अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई करते हुए, कोर्ट ने कॉमर्स और ट्रांसपोर्ट विभाग की पूर्व प्रधान सचिव उषा पाधी, फाइनेंस विभाग के प्रधान सचिव संजीव कुमार मिश्रा, ट्रांसपोर्ट कमिश्नर अमिताभ ठाकुर और चंडीखोल के RTO शिशिर कुमार साहू को एक हफ्ते के भीतर अपने आचरण के बारे में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। बेंच ने इस समय-सीमा को "सख्त और अनिवार्य" बताया और मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर के लिए तय की।

चीफ जस्टिस हरीश टंडन और जस्टिस एमएस रमन की डिवीजन बेंच ने पात्रा को बहाल करने के आदेश का पालन करने में ओडिशा सरकार के सीनियर अधिकारियों के "सुस्त और ढुलमुल रवैये" पर कड़ी नाराजगी जताई। साथ ही चेतावनी दी कि कोर्ट के निर्देश को लागू करने में लगातार देरी या कार्रवाई न करना खुद अवमानना ​​के दायरे में आ सकता है।

बेंच ने कहा, "कोर्ट मूकदर्शक बनकर सरकारी अधिकारियों के इशारों पर काम नहीं कर सकता।" बेंच ने आगे कहा, "आदेश का पालन सुनिश्चित करने में अधिकारियों का सुस्त और/या ढुलमुल रवैया भी अवमाननापूर्ण कृत्य है।"

पात्रा को 16 जनवरी 1997 को जाजपुर जिले में चंडीखोल RTO ऑफिस में एक खाली पद पर अस्थायी/एड-हॉक आधार पर प्रोसेस-सर्वर (ग्रुप-D) के तौर पर नियुक्त किया गया था। RTO ऑफिस में अस्थायी/एड-हॉक पदों को खत्म किए जाने के बाद 21 दिसंबर 2019 को उनकी सेवा समाप्त कर दी गई थी।

 

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