भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने भद्रक जिले के चांदबली में बीडीओ के पद पर तैनात प्रशासनिक अधिकारी संजीव कुमार महापात्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से गुरुवार को जारी आदेश में यह जानकारी दी गई। आदेश के अनुसार महापात्रा की सेवाएं पंचायती राज एवं पेयजल विभाग से वापस लेते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है।

सरकारी आदेश में कहा गया है कि ओडिशा सिविल सर्विसेज क्लासिफिकेशन, कंट्रोल एंड अपील नियम 1962 के नियम-12 के उप-नियम (1) के खंड (a) के तहत प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए राज्यपाल हरि बाबू कम्भमपति ने संजीव कुमार महापात्रा को निलंबित किया है।

निलंबन आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इस अवधि के दौरान महापात्रा का मुख्यालय भद्रक कलेक्ट्रेट निर्धारित किया गया है। इसका मतलब है कि वह निलंबन अवधि में बिना सक्षम अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।

संजीव कुमार महापात्रा चांदबली ब्लॉक में बीडीओ के पद पर कार्यरत थे। बीडीओ के रूप में उनके जिम्मे ब्लॉक स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था, विकास योजनाओं का क्रियान्वयन और विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों की निगरानी से जुड़े कार्य थे।

सरकार की ओर से जारी आदेश में साफ किया गया है कि उनके खिलाफ विभागीय स्तर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है। इसी प्रक्रिया के मद्देनजर उन्हें सेवा से निलंबित रखने का निर्णय लिया गया है।

राज्य सरकार की इस कार्रवाई के बाद चांदबली प्रशासनिक क्षेत्र में भी हलचल बढ़ गई है। बीडीओ का पद ब्लॉक प्रशासन का महत्वपूर्ण पद माना जाता है और ग्रामीण विकास से जुड़ी कई योजनाओं का क्रियान्वयन इसी स्तर से होता है।

आदेश के मुताबिक महापात्रा की सेवाएं पंचायती राज एवं पेयजल विभाग से वापस ली गई हैं। इसके बाद राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने निलंबन की कार्रवाई की।

निलंबन के दौरान महापात्रा सेवा में बने रहेंगे, लेकिन नियमित प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं करेंगे। उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई विभागीय प्रक्रिया और जांच के आधार पर तय होगी।

सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार किए जाने की स्थिति में संबंधित सेवा नियमों के तहत निलंबन का प्रावधान है। इसी नियम का इस्तेमाल इस मामले में भी किया गया है।

आदेश में OCS (CC&A) नियम 1962 का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। यह नियम राज्य सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई से संबंधित प्रक्रिया तय करता है।

महापात्रा के निलंबन के बाद चांदबली ब्लॉक में प्रशासनिक कामकाज को सुचारु बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने की संभावना है। बीडीओ स्तर की जिम्मेदारी किसी अन्य अधिकारी को सौंपी जा सकती है।

चांदबली भद्रक जिले का महत्वपूर्ण ब्लॉक है। यहां विकास योजनाओं, पंचायत स्तर की परियोजनाओं और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े प्रशासनिक कामकाज की जिम्मेदारी बीडीओ कार्यालय के माध्यम से पूरी की जाती है।

इस वजह से बीडीओ के निलंबन के बाद प्रशासन की प्राथमिकता यह होगी कि ब्लॉक स्तर की योजनाओं और दैनिक प्रशासनिक कार्यों पर असर न पड़े।

महापात्रा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई किन विशिष्ट आरोपों के आधार पर प्रस्तावित है, इसकी पूरी विस्तृत जानकारी आदेश में सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार विभाग ने कार्रवाई के लिए सेवा नियमों का सहारा लिया है।

निलंबन किसी अधिकारी को अंतिम रूप से दोषी ठहराने की कार्रवाई नहीं होती। विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आरोपों और आगे की जिम्मेदारी पर अंतिम निर्णय लिया जाता है।

इस दौरान संबंधित अधिकारी को भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जा सकता है।

सरकारी आदेश जारी होने के बाद भद्रक जिला प्रशासन को भी इसकी सूचना दे दी गई है, क्योंकि निलंबन अवधि के दौरान महापात्रा का मुख्यालय भद्रक कलेक्ट्रेट रहेगा।

भद्रक कलेक्ट्रेट मुख्यालय तय किए जाने के कारण महापात्रा को प्रशासन की निगरानी में निर्धारित स्थान पर उपस्थित रहना होगा।

विभागीय कार्रवाई की आगे की प्रक्रिया में आरोपों से जुड़े रिकॉर्ड, संबंधित दस्तावेज और प्रशासनिक कार्यों की समीक्षा की जा सकती है।

यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो सेवा नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई तय की जा सकती है।

वहीं यदि जांच में आरोप साबित नहीं होते हैं तो विभाग उसी के अनुसार निर्णय ले सकता है।

इस पूरे मामले में राज्य सरकार की ओर से फिलहाल इतना स्पष्ट किया गया है कि महापात्रा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार चल रहा है और इसी के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।

सरकार की ओर से हाल के महीनों में प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की सरकार ने जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को योजनाओं की निगरानी तथा समय पर सेवा उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं।

चांदबली के बीडीओ के खिलाफ यह कार्रवाई भी प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि उनके खिलाफ लगाए गए किसी विशेष आरोप पर अंतिम निष्कर्ष विभागीय जांच के बाद ही सामने आएगा।

स्थानीय स्तर पर भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। ब्लॉक से जुड़े विकास कार्यों, योजनाओं और प्रशासनिक निर्णयों पर नजर रखने वाले लोगों की निगाह अब आगे की विभागीय कार्रवाई पर है।

महापात्रा के स्थान पर नया बीडीओ या प्रभारी अधिकारी कब नियुक्त होगा, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

राज्य सरकार के आदेश के बाद फिलहाल संजीव कुमार महापात्रा बीडीओ के रूप में कार्य नहीं करेंगे और उनका मुख्यालय भद्रक कलेक्ट्रेट रहेगा।

सरकारी सेवा नियमों के अनुसार निलंबन अवधि में अधिकारी को तय शर्तों और निर्देशों का पालन करना होता है।

अब अगला महत्वपूर्ण चरण अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया होगी। इसमें सरकार तय करेगी कि उनके खिलाफ विभागीय जांच किस स्तर पर आगे बढ़ाई जाए।

फिलहाल राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग का आदेश लागू हो चुका है और चांदबली के बीडीओ संजीव कुमार महापात्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। आगे की कार्रवाई जांच और विभागीय प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।

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