Bhubaneswar भुवनेश्वर। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सोमवार को श्रीमंदिर रत्न भंडार की ज्वेलरी की ‘गणति-मनति’ (गिनती और सत्यापन) प्रक्रिया को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में मंदिर प्रशासन, पुरातत्व, सुरक्षा एजेंसियों और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य रत्न भंडार में सुरक्षित आभूषणों और कीमती वस्तुओं की पारदर्शी, व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से गिनती सुनिश्चित करना रहा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ‘गणति-मनति’ की पूरी प्रक्रिया परंपराओं, धार्मिक मान्यताओं और सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुरूप संपन्न हो। उन्होंने कहा कि श्रीमंदिर की गरिमा और श्रद्धालुओं की आस्था सर्वोपरि है, इसलिए हर कदम पर सावधानी और गोपनीयता बरती जाए। बैठक में सुरक्षा व्यवस्था, रिकॉर्डिंग, डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन और विशेषज्ञों की निगरानी जैसे पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि रत्न भंडार से जुड़ी कार्यवाही के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है, जिनमें आभूषण विशेषज्ञ, लेखा अधिकारी और तकनीकी कर्मी शामिल हैं। साथ ही, प्रक्रिया के दौरान सीसीटीवी निगरानी, मल्टी-लेयर सिक्योरिटी और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का सख्ती से पालन किया जाएगा।
बैठक में यह भी जोर दिया गया कि किसी भी प्रकार की अफवाह या गलत जानकारी को रोकने के लिए आधिकारिक संचार तंत्र को मजबूत किया जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों पर काम कर रही है, ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद या भ्रम न हो। श्रीमंदिर रत्न भंडार से जुड़ा विषय लंबे समय से संवेदनशील और जन-आस्था का केंद्र रहा है। ऐसे में सरकार की यह पहल प्रशासनिक सख्ती और धार्मिक परंपराओं के संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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