भुवनेश्वर: ओडिशा में पांच ओरांगुटान बरामद होने के बाद राज्य सरकार हरकत में आ गई है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी गहराई से जांच के निर्देश दिए हैं। अब स्पेशल टास्क फोर्स (STF) इस बात का पता लगाने में जुटी है कि दुर्लभ वन्यजीवों को भारत तक पहुंचाने के पीछे कौन-सा नेटवर्क काम कर रहा था और इसके तार किन देशों तथा राज्यों से जुड़े हैं।
ओरांगुटान भारत के मूल वन्यजीव नहीं हैं। ये मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया के वर्षावनों में पाए जाते हैं। ऐसे में ओडिशा में एक साथ पांच ओरांगुटान मिलने से अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी की आशंका गहरा गई है। जांच एजेंसियां इनके भारत पहुंचने के पूरे रास्ते और इसमें शामिल लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही हैं।
STF खंगाल रही तस्करी का नेटवर्क
मामले की जांच में STF के साथ वन विभाग और दूसरी संबंधित एजेंसियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। जांच का फोकस केवल बरामद जानवरों तक सीमित नहीं है। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि ओरांगुटान कहां से लाए गए और इन्हें किसे पहुंचाया जाना था। तस्करी में इस्तेमाल किए गए वाहनों, मोबाइल फोन, बैंक लेनदेन और आरोपियों के संपर्कों की पड़ताल से नेटवर्क की परतें खुल सकती हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस गिरोह ने इससे पहले भी विदेशी वन्यजीवों की तस्करी की है या नहीं।
मुख्यमंत्री ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने वन्यजीव अपराध के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए पूरे नेटवर्क तक पहुंचने पर जोर दिया है। सरकार की कोशिश केवल इस मामले में शामिल लोगों पर कार्रवाई करने की नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय तस्करी चैनल की पहचान करने की भी है। जरूरत पड़ने पर अन्य राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों से भी सहयोग लिया जा सकता है। अगर जांच में विदेश से जुड़े लिंक सामने आते हैं तो संबंधित अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ सूचनाओं का आदान-प्रदान भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
क्यों खास हैं ओरांगुटान?
ओरांगुटान दुनिया के सबसे दुर्लभ और संकटग्रस्त प्राइमेट्स में शामिल हैं। इनकी तीन प्रजातियां—बोर्नियन, सुमात्रन और तपानुली—प्रकृति संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय संघ (IUCN) की रेड लिस्ट में Critically Endangered श्रेणी में हैं। इनके अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी कड़े प्रतिबंध लागू हैं। अवैध वन्यजीव व्यापार में दुर्लभ विदेशी जानवरों को भारी कीमत पर बेचने की कोशिश की जाती है। तस्करी के दौरान उन्हें छोटे पिंजरों या असुरक्षित परिस्थितियों में लंबी दूरी तक ले जाने से उनकी जान को भी गंभीर खतरा रहता है।
तस्करों की पूरी चेन तक पहुंचने की कोशिश
पांच ओरांगुटान की बरामदगी को जांच एजेंसियां बड़े नेटवर्क की एक कड़ी के रूप में देख रही हैं। अब यह पता लगाया जा रहा है कि इसमें स्थानीय एजेंटों के अलावा सप्लायर, ट्रांसपोर्टर और खरीदार कौन थे। फिलहाल STF की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ होगा कि ओरांगुटान किस देश से भारत लाए गए, उनका अंतिम गंतव्य क्या था और इस कथित अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।
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