बच्चों की शिक्षा और पोषण व्यवस्था पर फोकस मेघालय में आंगनवाड़ी सुधार की तैयारी
मेघालय में आंगनवाड़ी भवनों की कमी
शिलांग: मेघालय में बच्चों के पोषण और शुरुआती शिक्षा से जुड़े 666 आंगनवाड़ी केंद्र अभी भी किराए या अस्थायी इमारतों से संचालित हो रहे हैं। राज्य सरकार ने विधानसभा में जानकारी दी कि कुल 6,188 आंगनवाड़ी केंद्रों में से 666 केंद्रों के पास अभी अपना स्थायी भवन नहीं है।
मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने विधानसभा में बताया कि किराए के भवनों में चल रहे केंद्रों की अस्थायी संरचनाओं पर अतिरिक्त खर्च नहीं किया जा रहा है, क्योंकि कई जगहों पर जमीन की उपलब्धता बड़ी चुनौती बनी हुई है। सरकार का लक्ष्य इन केंद्रों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
2,148 आंगनवाड़ी केंद्रों के निर्माण और सुधार का काम
सरकार ने आंगनवाड़ी केंद्रों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 2,148 केंद्रों के निर्माण और नवीनीकरण की योजना शुरू की है। इसके लिए ग्रामीण विकास विभाग और मनरेगा के साथ मिलकर काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इनमें से 1,670 केंद्रों का काम पूरा हो चुका है, जबकि बाकी केंद्रों का काम जल्द पूरा होने की उम्मीद है। इस परियोजना के लिए करीब 64 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।
बच्चों और माताओं को मिलती हैं कई सेवाएं
आंगनवाड़ी केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और शुरुआती शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन केंद्रों के माध्यम से बच्चों को गर्म पका हुआ भोजन, पोषण आहार और स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
सरकार ने बताया कि पूरक पोषण कार्यक्रम के तहत महीने में 25 दिनों तक सेवाएं दी जा रही हैं। इसमें 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए गर्म भोजन और छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं व स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए टेक होम राशन उपलब्ध कराया जाता है।
स्थायी भवनों की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए स्थायी भवन होने से बच्चों को सुरक्षित और बेहतर माहौल मिल सकेगा। किराए या अस्थायी भवनों में जगह, स्वच्छता और सुविधाओं से जुड़ी कई परेशानियां सामने आती हैं।
मेघालय सरकार अब चरणबद्ध तरीके से सभी आंगनवाड़ी केंद्रों को बेहतर सुविधाओं से लैस करने की दिशा में काम कर रही है।